जानिए कौन हैं आईपीएस शैलजा दास, जो बीपीएससी प्रदर्शन के दौरान अपने कड़क अंदाज को लेकर चर्चा में आईं करियर एक घंटा पहले 5
पटना में बीपीएससी छात्रों के आंदोलन के बीच वायरल हो रहे वीडियो को लेकर आईपीएस शैलजा दास सुर्खियों में हैं। महज 23 साल की उम्र में यूपीएससी में सफलता पाने वाली सहरसा की बेटी शैलजा दास के संघर्ष और करियर की पूरी कहानी यहां पढ़ें।

बीपीएससी प्रदर्शन के दौरान वायरल हुआ वीडियो

बिहार की राजधानी पटना में बीते कुछ दिनों से बीपीएससी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक महिला आईपीएस अधिकारी का वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है। वीडियो में पटना की सड़कों पर तैनात आईपीएस अधिकारी शैलजा दास प्रदर्शनकारी छात्रों से काफी सख्त लहजे में बात करती नजर आ रही हैं। वह प्रदर्शनकारियों को यह निर्देश देती दिख रही हैं कि वार्ता के लिए निर्धारित 20 लोगों का प्रतिनिधिमंडल आगे जाए और बाकी लोग वहां से हट जाएं। इस दौरान उनका गुस्सा और कड़क अंदाज साफ तौर पर देखा जा सकता है।

कौन हैं आईपीएस शैलजा दास

शैलजा दास बिहार के सहरसा जिले की रहने वाली हैं। उनका जन्म 7 नवंबर 1997 को हुआ था। वे 2022 बैच की बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। अपनी उम्र के चलते उन्हें अक्सर 'जेन-जेड' पीढ़ी का आईपीएस अधिकारी भी कहा जाता है। उन्होंने न केवल बहुत कम उम्र में यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास किया, बल्कि अपनी कार्यशैली को लेकर भी वे युवा पीढ़ी के लिए एक चर्चा का विषय बन गई हैं।

सहरसा से दिल्ली तक का सफर

शैलजा दास का शुरुआती जीवन सहरसा में बीता। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा वहीं के बुद्धा पब्लिक स्कूल से प्राप्त की और वर्ष 2013 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा की चाहत में वे इसके बाद दिल्ली चली गईं। दिल्ली के प्रतिष्ठित डीपीएस आरके पुरम से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने 96.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला लिया और अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने का निर्णय लिया।

यूपीएससी में सफलता की कहानी

आईपीएस शैलजा दास का यूपीएससी का सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने वर्ष 2020 में अपना पहला प्रयास किया, जिसमें वे इंटरव्यू के चरण तक पहुंचने में सफल रहीं। हार न मानते हुए, उन्होंने वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में पुनः भाग लिया और इस बार ऑल इंडिया में 83वीं रैंक हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। मात्र 23 साल की उम्र में आईपीएस बनने का सपना उन्होंने साकार कर दिखाया। अपनी सफलता के पीछे के मंत्र के बारे में बात करते हुए उन्होंने हमेशा एनसीईआरटी की किताबों और मानक अध्ययन सामग्रियों को गंभीरता से पढ़ने पर जोर दिया है। परीक्षा के दौरान उन्होंने इतिहास को अपना वैकल्पिक विषय चुना था।

प्रशिक्षण और करियर की शुरुआत

वर्ष 2022 बैच की अधिकारी बनने के बाद, शैलजा दास को बिहार कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने अपनी सेवा का आगाज वैशाली जिले के लालगंज में किया। वहां उन्होंने बतौर प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी और थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी संभालते हुए जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद उन्हें नालंदा जिले के हिलसा अनुमंडल में एसडीपीओ-1 के पद पर तैनात किया गया। हिलसा में भी उनके काम और प्रशासनिक क्षमता की काफी सराहना हुई थी।

पटना सिटी एसपी के रूप में नियुक्ति

राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक फेरबदल के क्रम में 18 जून 2026 को शैलजा दास का तबादला नालंदा से पटना कर दिया गया। उन्हें पटना पूर्वी का नगर पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया। पटना जैसे महत्वपूर्ण शहर में कानून-व्यवस्था की बागडोर एक युवा अधिकारी को सौंपने का निर्णय काफी चर्चा में रहा। अपनी नियुक्ति के बाद से ही वे अपनी कार्यप्रणाली के लिए निरंतर सुर्खियां बटोरती रही हैं।

सोशल मीडिया पर पहले भी रही हैं चर्चा

यह पहला मौका नहीं है जब शैलजा दास का कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इससे पहले भी उनका एक वीडियो काफी चर्चित हुआ था, जिसमें उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अपनी राय रखी थी। उस वीडियो में उन्होंने कहा था कि हर किसी को बोलने का अधिकार है, लेकिन जब तक प्रदर्शनकारी पुलिस पर बल का प्रयोग नहीं करेंगे, तब तक पुलिस की ओर से भी कोई बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उनके उस संयमित व्यवहार को देखकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें 'लेडी सिंघम' और बिहार की नई पीढ़ी की तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी के रूप में सराहा था।

बीपीएससी आंदोलन और मौजूदा स्थिति

वर्तमान में पटना में बीपीएससी परीक्षा को लेकर हो रहे छात्र आंदोलन ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया है। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हुए उनका प्रदर्शनकारियों को सख्त हिदायत देने वाला नया वीडियो सामने आया है। एक तरफ जहां उनके व्यवहार को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वहीं उनकी प्रशासनिक सजगता और कम उम्र में हासिल की गई उनकी उपलब्धियां युवाओं को लगातार प्रेरित कर रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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