बिहार
2 घंटे पहले
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भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां करोड़ों लोगों की आजीविका और खान-पान सीधे तौर पर खेती-बाड़ी से ही चलता है। यही कारण है कि सरकार भी इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देती है और किसानों के कल्याण के लिए सैकड़ों योजनाएं धरातल पर चलाई जा रही हैं। बदलते वक्त के साथ खेती करने के तरीकों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब पारंपरिक तौर-तरीकों की जगह आधुनिक मशीनों ने ले ली है, जिससे खेती का काम काफी आसान और सुगम हो गया है। हालांकि, इस बदलाव के बीच अधिक और जल्दी उत्पादन हासिल करने की होड़ में फसलों की हाइब्रिड किस्मों और रासायनिक खादों का प्रयोग भी बहुत तेजी से बढ़ा है।
जहानाबाद के राजू कुमार ने पेश की नई मिसाल
रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल के इस दौर में बिहार के जहानाबाद के रहने वाले किसान राजू कुमार ने एक नई राह चुनी है। उन्होंने भूमि और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली रासायनिक खेती को पूरी तरह से अलविदा कह दिया है। राजू कुमार ने अपनी 3 एकड़ कृषि भूमि पर पूरी तरह से प्राकृतिक खेती करने का फैसला किया। उनका यह निर्णय न केवल पर्यावरण के अनुकूल साबित हुआ, बल्कि उनके लिए आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद रहा है।
प्राकृतिक खेती से बढ़ा मुनाफा
आमतौर पर यह माना जाता है कि रासायनिक खादों के बिना उत्पादन और मुनाफे में कमी आ सकती है, लेकिन राजू कुमार ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनके मुनाफे में सीधे तौर पर 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस पद्धति से खेती करने पर जहां एक ओर उनकी लागत में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर फसलों की गुणवत्ता बेहतर होने से उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं।
आधुनिकता के साथ प्राकृतिक संतुलन की जरूरत
कृषि क्षेत्र में आ रहे बदलावों के बीच मशीनीकरण ने किसानों का काम तो आसान किया है, लेकिन मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती की ओर वापस लौटना आज के समय की बड़ी मांग बन चुका है। राजू कुमार का यह सफल प्रयास अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है, जो साबित करता है कि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग करके न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि अपनी आमदनी को भी बढ़ाया जा सकता है।
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