बिहार
22 घंटे पहले
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विचारों
बिहार के युवा अब केवल सरकारी नौकरी की राह नहीं देख रहे, बल्कि छोटे-मोटे रोजगार और उद्योग-धंधों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई युवाओं की सोच यह बन चुकी है कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बनें। इसी दिशा में सरकार की ओर से भी मदद दी जा रही है। कई ऐसी योजनाएं हैं जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और युवा उनका लाभ उठाकर अपना काम खड़ा कर रहे हैं। इन्हीं योजनाओं की बदौलत कई परिवारों की तकदीर बदल गई है।
योजना की जानकारी मिलते ही कर दिया आवेदन
ऐसे ही एक युवा हैं जहानाबाद जिले के मोदनगंज ब्लॉक के नीतीश कुमार। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने रोजगार की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री लघु उद्यमी योजना के बारे में पता चला। जानकारी मिलते ही उन्होंने बिना देर किए उद्योग विभाग से संपर्क किया और आवेदन कर दिया। कुछ ही समय बाद इस योजना के लिए उनका चयन हो गया। अब तक उन्हें दो किस्तें मिल चुकी हैं, जिनकी मदद से वे गांव में ही साइबर कैफे चला रहे हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं।
पढ़ाई के साथ चल रहा उद्योग
नीतीश कुमार बताते हैं कि फिलहाल उनकी पढ़ाई जारी है और वे उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। वे एमएड की डिग्री हासिल कर रहे हैं और इसके बाद पीएचडी करने की योजना है। उन्होंने बताया कि घर की हालत ठीक न होने के कारण उन्होंने उद्योग शुरू किया। अभी वे गांव में ही साइबर कैफे चला रहे हैं, जिससे अच्छी आमदनी हो रही है। पहले जहां उन्हें दिन भर घर पर बैठकर समय बिताना पड़ता था, वहीं सरकारी योजना का लाभ उठाकर उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया।
हर महीने ₹30000 तक की आमदनी
नीतीश आगे बताते हैं कि उन्होंने यह काम सिर्फ अपनी कमाई के मकसद से शुरू नहीं किया। दरअसल, उनके गांव से किसी भी फॉर्म का आवेदन करने के लिए 5 किमी का सफर तय करना पड़ता था, जिससे कभी-कभी काफी परेशानी होती थी। अब जब यह साइबर कैफे शुरू हो गया है तो गांव में ही हर तरह का आवेदन हो जाता है। इससे उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है और हर महीने ₹30000 तक की आमदनी हो जा रही है।
नीतीश के मुताबिक, जिस सरकारी योजना से उन्हें राशि मिली है, उसकी अब तक 2 किस्तें ही मिल पाई हैं और तीसरी किस्त की राशि अभी तक नहीं मिली है। उनका कहना है कि अगर यह राशि भी मिल जाती है तो उनके काम में और तेजी आएगी।
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