खेती की लगन: 35 साल पुराना ट्रैक्टर आज भी खेतों में सरपट दौड़ रहा, जहानाबाद के किसान चंद्र शेखर ने सुनाया खरीद का किस्सा बिहार 2 घंटे पहले 3
जहानाबाद के किसान चंद्र शेखर ने 1990 में 22 एकड़ जमीन के आधार पर करीब 2 लाख रुपये में HMT ट्रैक्टर खरीदा था, जो 35 साल बाद भी पूरी तरह दुरुस्त है और आज भी जुताई-बुआई का काम कर रहा है।

हमारे देश में आजीविका का सबसे बड़ा आधार आज भी खेती-किसानी ही है। बीते दौर में जब इतनी आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं, तब किसानों को खेती में बेहद कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। उस समय खेत जोतने के लिए बैल, भैंस और इंसानी ताकत ही एकमात्र सहारा थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और आधुनिकता ने दस्तक दी, खेती का तौर-तरीका भी धीरे-धीरे बदलता चला गया। बैल की जगह अब ट्रैक्टर ने ले ली।

जिस तरह खाद और बीज के बिना फसल उगाना संभव नहीं, उसी तरह आज ट्रैक्टर के बिना खेती का काम पूरा करना भी मुश्किल है। खेती में ट्रैक्टर की अहमियत खाद-बीज जितनी ही मानी जाती है। मौजूदा समय में सरकार भी ट्रैक्टर की खरीद पर किसानों को मदद देती है, जिससे इसे खरीदना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। लेकिन सोचिए, जिस दौर में ट्रैक्टर अभी-अभी आया था और गिने-चुने लोगों के पास ही होता था, तब इसकी खरीदारी कैसे होती होगी?

22 एकड़ जमीन पर आज भी कर रहे खेती

जहानाबाद जिले के किसान चंद्र शेखर इसी पुराने दौर की कहानी के गवाह हैं। वह आज भी 22 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और अपने खेतों में हर तरह की फसल उगाते हैं। उनके पास मौजूद ट्रैक्टर की कहानी अपने आप में दिलचस्प है।

दादा के जमाने से चली आ रही है खेती

लोकल 18 से बातचीत में चंद्र शेखर बताते हैं कि उनके यहां दादा के समय से ही खेती-बाड़ी होती आ रही है। आज वह भी इसी पेशे से जुड़े हैं और परिवार का खर्च इसी से चला रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि नई पीढ़ी अब खेती से दूरी बनाने लगी है।

वह बताते हैं कि बात 1990 की है, जब खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य जरिया हुआ करती थी। उनके पिता का मानना था कि इतनी बड़ी जमीन पर सिर्फ बैल और इंसानी ताकत के सहारे खेती करना बेहद कठिन है। इसी वजह से उन्होंने ट्रैक्टर खरीदने का मन बनाया। इसके बाद वे यह पता लगाने में जुट गए कि ट्रैक्टर की कीमत क्या है, उसके बॉडी पार्ट्स कहां तैयार होते हैं और आखिर ट्रैक्टर मिलता कैसे है।

35 साल पहले करीब 2 लाख में बना था ट्रैक्टर

चंद्र शेखर आगे बताते हैं कि उस दौर में नियम था कि ट्रैक्टर सिर्फ उन्हीं किसानों को मिल सकता था, जिनके पास 22 एकड़ से ज्यादा जमीन हो। उनके पास 22 एकड़ जमीन थी, इसी आधार पर उन्होंने HMT कंपनी का ट्रैक्टर खरीदा।

उनके मुताबिक इंजन पार्ट्स की कीमत एक लाख 40 हजार रुपये थी, जबकि अलग से बॉडी पार्ट्स और बाकी सामान खरीदने तथा उसे तैयार कराने में मिलाकर करीब 2 लाख रुपये का खर्च आया था। इस ट्रैक्टर को आज 35 साल हो चुके हैं, फिर भी यह पूरी तरह सही-सलामत हालत में है। चंद्र शेखर आज भी इसी ट्रैक्टर से जुताई और बुआई समेत खेती का सारा काम करते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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