राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
4
विचारों
सुप्रीम कोर्ट का छात्र आंदोलनों पर बड़ा निर्णय
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए व्यापक छात्र आंदोलनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच पूरे देश में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी पुरानी प्राथमिकियों यानी FIR को रद्द करने का निर्देश दिया है। यह कदम छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दिल्ली पुलिस को मिली नई FIR की अनुमति
इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू उन लोगों से संबंधित है, जिन्हें पुलिस ने गंभीर अपराधी बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस को 2873 ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की पूरी छूट दे दी है, जिनके बारे में पुलिस का दावा है कि उनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड काफी गंभीर है और वे जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित थे।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा रखी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों को तो समाप्त किया जाएगा, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उन व्यक्तियों की भूमिका की जांच अलग से की जानी चाहिए, जो प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद थे।
जांच का दायरा और पुलिस का तर्क
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया था, जिसमें 13 पुरानी FIR को बंद करने के साथ-साथ 2,873 लोगों के खिलाफ नए सिरे से मामले दर्ज करने की मांग की गई थी। पुलिस का तर्क है कि इन व्यक्तियों के नाम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों में गंभीर अपराधों से जुड़े हैं और प्रदर्शन के दौरान उनकी पहचान पुख्ता की गई है।
पुलिस का मुख्य उद्देश्य इस बात की जांच करना है कि क्या इन 2873 लोगों में से किसी ने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा भड़काने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या किसी को चोट पहुंचाने जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को इसी विशिष्ट और सीमित दायरे में जांच करने की अनुमति प्रदान की है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने फैसले का स्वागत किया
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने इस आदेश को 'पूर्ण न्याय' की संज्ञा दी है और कहा कि इससे उन संघर्षरत छात्रों और NEET पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को न्याय मिला है।
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी इस निर्णय का समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शुरू से ही इस पक्ष में थी कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर अपराधी है और उसने प्रदर्शन के दौरान कानून हाथ में लिया है, तो उसके विरुद्ध विधिवत कार्रवाई होनी ही चाहिए।
सौरव दास ने उठाए कुछ गंभीर सवाल
हालांकि, सौरव दास ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कुछ तीखे सवाल भी खड़े किए। उन्होंने पूछा कि पुलिस ने चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक (फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी) के आधार पर जिन 2873 लोगों को चिह्नित किया है और जिन्हें गंभीर अपराधी बताया है, वे अब तक समाज में खुलेआम कैसे घूम रहे थे? उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने हत्या या दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध किए हैं, तो निश्चित रूप से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर सजा भी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकार
यह फैसला संवैधानिक दृष्टिकोण से भी काफी मायने रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लिया है। अदालत ने कहा कि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और उनके कॅरियर की संभावनाओं को ध्यान में रखना जरूरी है, इसलिए सामान्य छात्रों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को खत्म किया जा रहा है।
हालांकि, इस राहत का अर्थ यह कतई नहीं है कि प्रदर्शन से जुड़ा हर व्यक्ति जांच के दायरे से बाहर हो गया है। दिल्ली पुलिस द्वारा चिह्नित 2873 लोगों के मामले में पुलिस अब अपनी नई जांच प्रक्रिया शुरू करेगी और यह देखा जाएगा कि क्या उनके खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं या नहीं।
Comments
0 comment