जंतर-मंतर पैलेट गन मामला: राहुल गांधी के दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR, जानिए क्या है पूरा घटनाक्रम राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 2
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुई पैलेट गन फायरिंग मामले में आखिरकार पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप और थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन के बाद यह कार्रवाई हुई है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली के संसद मार्ग थाने में जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पैलेट गन की घटना को लेकर आखिरकार एक एफआईआर दर्ज कर ली गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं द्वारा थाने के बाहर किए गए दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा 118(1) और धारा 125 के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये धाराएं किसी व्यक्ति को जानबूझकर खतरनाक हथियारों से गंभीर चोट पहुंचाने और दूसरों के जीवन को खतरे में डालने से संबंधित हैं।

एफआईआर का विवरण

संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई FIR संख्या 0085 के अनुसार, यह मामला 21 अगस्त 2026 को शाम 18:09 बजे पंजीकृत किया गया। आधिकारिक दस्तावेजों में घटना के मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:

  • घटना की तारीख और समय: 20 जुलाई 2026, दोपहर 12:00 बजे से शाम 17:00 बजे के बीच।
  • घटना का स्थल: जंतर-मंतर, नई दिल्ली।
  • शिकायतकर्ता: 20 वर्षीय छात्र साहिल, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में अध्ययनरत है और नजफगढ़ का निवासी है।
  • आरोपी: एक अज्ञात व्यक्ति जिसने नीले रंग की पोशाक पहनी हुई थी।

शिकायतकर्ता की आपबीती

शिकायतकर्ता छात्र साहिल ने अपनी लिखित शिकायत में बताया है कि वह 20 जुलाई 2026 को नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में आयोजित छात्र प्रदर्शन में शामिल होने गया था। प्रदर्शन के दौरान जब अचानक लाठीचार्ज हुआ और भगदड़ मच गई, तो वह भी वहां से निकलने की कोशिश कर रहा था। साहिल के अनुसार, उसके हाथ में उस समय तिरंगा था। तभी वहां मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति ने, जिसने नीली पोशाक पहनी थी, एक बड़ी बंदूक से उसके ऊपर धातु के छर्रे यानी पैलेट चला दिए।

गंभीर चोटें और चिकित्सा स्थिति

साहिल को लगी चोटें बेहद गंभीर हैं। हमले के दौरान उसे चार से पांच बार निशाना बनाया गया, जिससे उसके शरीर के कई हिस्सों में छर्रे धंस गए। उसके चेहरे, छाती, हाथों और आंखों में गंभीर घाव हो गए और उसकी दाहिनी आंख की रोशनी पूरी तरह खत्म हो गई है। उपचार के संबंध में स्थिति इस प्रकार है:

  • अस्पताल और उपचार: उसे तुरंत सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उसे एम्स के RPC आई सेंटर और ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
  • सीटी स्कैन की रिपोर्ट: 22 जुलाई 2026 को किए गए सीटी स्कैन में यह खुलासा हुआ कि छात्र के शरीर में 200 से अधिक धातु के छर्रे धंसे हुए हैं। ये छर्रे उसके जबड़े, गर्दन, छाती (दिल के बेहद करीब) और बाजू में स्थित हैं।
  • दृष्टि वापस आने की संभावना: डॉक्टरों का कहना है कि आंख के गड्ढे में जो पैलेट सबसे गहराई में धंसा है, वह नस के काफी करीब है। इसे निकालने का जोखिम नहीं लिया जा सकता। वर्तमान में उसकी दाहिनी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना 1 प्रतिशत से भी कम है।

कानूनी देरी पर सवाल

पीड़ित साहिल और उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद करीब चार हफ्ते तक पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। मामला दर्ज करवाने के लिए उन्हें लगातार पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़े। आखिरकार राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद जब संसद मार्ग थाने के बाहर विरोध शुरू हुआ, तो पुलिस प्रशासन हरकत में आया। अब मामले की जांच की जिम्मेदारी उप-निरीक्षक SI मोहित वर्मा को सौंपी गई है, जो इस मामले में I.O. यानी जांच अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। फिलहाल, अज्ञात आरोपी की तलाश जारी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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