जमुई की बेटी का कमाल: 14 घंटे की कड़ी मेहनत और 35 से ज्यादा पैटर्न्स से संवारा बिहार का नक्शा बिहार 2 महीने पहले 65
जमुई की रहने वाली अनीशा दुबे ने अपनी अद्भुत कलाकारी से बिहार और भारत के नक्शे को मधुबनी और मंडला आर्ट के जरिए एक नई पहचान दी है। उनकी इस अनोखी पेंटिंग में 35 से अधिक अलग-अलग पैटर्न का इस्तेमाल किया गया है, जिसे बनाने में उन्होंने करीब 14 घंटे का समय लगाया है।

कला और संस्कृति का अद्भुत संगम

बिहार की पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन जमुई जिले की एक होनहार बेटी ने इसे एक नया आयाम दिया है। जमुई जिला मुख्यालय की निवासी अनीशा दुबे ने पारंपरिक मधुबनी कला और मंडला आर्ट के मिश्रण से बिहार और भारत के नक्शे को इतनी खूबसूरती से उकेरा है कि देखने वाले दंग रह जाते हैं। आमतौर पर मधुबनी पेंटिंग को लोग दीवारों या कागज पर स्वतंत्र चित्रों के रूप में बनाते हैं, लेकिन अनीशा ने भौगोलिक मानचित्रों को अपनी कला का कैनवास बनाया है।

14 घंटे की मेहनत और 35 अनूठे पैटर्न

अनीशा की इस पेंटिंग की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई बारीकियां हैं। इस नक्शे को तैयार करने में अनीशा ने कुल 14 घंटे का समय बिताया है। उन्होंने बताया कि इस काम को पूरा करने के लिए उन्होंने करीब चार दिनों तक लगातार मेहनत की, जिसमें वह रोजाना तीन से चार घंटे तक कलाकारी करती थीं। इस पेंटिंग की खासियत यह है कि इसमें 35 से भी अधिक अलग-अलग पैटर्न का प्रयोग किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे नक्शे में किसी भी एक पैटर्न को दोबारा दोहराया नहीं गया है, जिससे इसकी खूबसूरती और भी निखर कर सामने आती है।

अनोखी शैली का विकास

अनीशा ने बिहार के साथ-साथ भारत के नक्शे को भी अपनी अनूठी कला शैली से सजाया है। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही चित्रकारी का गहरा शौक था। जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, उनका यह शौक एक जुनून में बदल गया। घर में खाली समय मिलने पर वह अक्सर पेंटिंग में डूबी रहती थीं। उन्होंने मधुबनी और मंडला कला को इंटरनेट और मोबाइल ऐप के माध्यम से सीखना शुरू किया। शुरुआती दौर में वह केवल देख-देखकर कागज पर अभ्यास करती थीं। हालांकि, उस समय उन्हें इन कला शैलियों के नाम तक नहीं पता थे, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बारीकियों को समझा और आज वह इस कला में महारत हासिल कर चुकी हैं।

सफलता और प्रशंसा का सफर

आज अनीशा दुबे कई दर्जन पेंटिंग बना चुकी हैं, जिनमें से हर एक अपने आप में बेजोड़ है। उनके द्वारा बिहार के नक्शे पर की गई यह शानदार कारीगरी सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग उनकी प्रतिभा की जमकर तारीफ कर रहे हैं। अनीशा का मानना है कि कला के जरिए अपनी संस्कृति को संजोना न केवल उनके लिए सुकून का काम है, बल्कि अपनी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक माध्यम भी है। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के, केवल अपनी लगन और इंटरनेट पर उपलब्ध संसाधनों से उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। जमुई के लोग उनकी इस कलाकारी पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उम्मीद है कि आने वाले समय में वह अपनी कला से राज्य और देश का नाम और रोशन करेंगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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