जमशेदपुर के रवि राज मुर्मू का कमाल, फिल्म 'आगेन' ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में गाड़ा झंडा झारखंड एक महीने पहले 45
जमशेदपुर के युवा निर्देशक रवि राज मुर्मू की संताली शॉर्ट फिल्म 'आगेन' को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक के सम्मान से नवाजा गया है, जिससे पूरे झारखंड में जश्न का माहौल है।

झारखंड के होनहार रवि राज मुर्मू ने रचा इतिहास

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले युवा फिल्म निर्माता रवि राज मुर्मू ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। हाल ही में घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में, उनकी संताली भाषा की लघु फिल्म 'आगेन' को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक की श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। यह उपलब्धि न केवल रवि राज मुर्मू के लिए बल्कि पूरे झारखंड राज्य और संताली भाषी समुदाय के लिए एक गर्व का क्षण है। इस सम्मान ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर तैयार की गई फिल्में और क्षेत्रीय भाषा की कहानियां भी राष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ सकती हैं।

जादूगोड़ा की मिट्टी से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा जैसे छोटे से क्षेत्र से निकलकर रवि राज मुर्मू का इस मुकाम तक पहुंचना कई संघर्षों और जुनून की दास्तान है। बचपन से ही कला और रचनात्मकता की ओर झुकाव रखने वाले रवि ने अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद फिल्म निर्माण के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को अपना करियर चुना। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और बेहतर सोचने की क्षमता के दम पर उन्होंने न केवल एक फिल्म बनाई, बल्कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाई। उनके इस सफर ने यह दिखाया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

क्या है फिल्म 'आगेन' का मुख्य विषय

लगभग 12 मिनट की इस लघु फिल्म ने समीक्षकों और दर्शकों का दिल जीत लिया है। फिल्म में संताली समाज के आधुनिक जीवन, पुरानी लोककथाओं और समृद्ध परंपराओं के बीच पनप रहे द्वंद्व को बहुत ही गहराई और संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया है। फिल्म का प्रमुख उद्देश्य समाज की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों की ओर वापस ले जाना है। कहानी इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे आधुनिकता की अंधी दौड़ में आज के युवा अपनी मूल भाषा, संस्कृति और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। 'आगेन' न केवल एक फिल्म है, बल्कि एक संदेश भी है जो हर किसी को अपनी विरासत को संजोकर रखने की प्रेरणा देता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने रवि

रवि राज मुर्मू की इस शानदार सफलता ने झारखंड के अन्य उभरते फिल्मकारों और कलाकारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। उनकी कामयाबी यह सिद्ध करती है कि एक कलाकार के पास अगर जुनून हो, तो वह अपनी बात को अपनी मातृभाषा के माध्यम से पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रख सकता है। रवि की इस उपलब्धि पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और कला जगत से जुड़े दिग्गजों ने बधाई दी है। जमशेदपुर वासियों का मानना है कि रवि ने अपनी कलात्मक दृष्टि से न केवल शहर का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई पर ले जाने का काम किया है। यह पुरस्कार निश्चित रूप से भविष्य में झारखंड के फिल्म जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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