जमशेदपुर के दोमुहानी संगम तट पर पंच धूनी तपस्या, अग्नि की लपटों के बीच साधना में लीन संत झारखंड एक घंटा पहले 2
जमशेदपुर के सोनारी स्थित दोमुहानी संगम तट पर इन दिनों अखंड पंच धूनी तपस्या चल रही है, जिसमें भीषण गर्मी और चारों ओर जलती अग्नि के बीच संत साधनारत हैं। इस दुर्लभ तप को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

जमशेदपुर के सोनारी क्षेत्र में स्थित दोमुहानी संगम तट इन दिनों आस्था और साधना का केंद्र बन गया है। यहां श्री पंच दशनाम जूना किन्नर अखाड़ा की झारखंड इकाई के तत्वावधान में अखंड पंच धूनी तपस्या का आयोजन हो रहा है। इस विशेष साधना का नेतृत्व 1008 महामंडलेश्वर अमरजीत नंद गिरी कर रहे हैं। भरी दोपहर में सिर पर तपते सूर्य और चारों ओर सुलगती आग के बीच बैठकर संत जो साधना कर रहे हैं, वह आमजन के लिए विस्मय और श्रद्धा का विषय बनी हुई है।

चारों ओर अग्नि और बीच में बैठे साधक

पंच धूनी तपस्या को सनातन परंपरा की एक अत्यंत कठिन और दुर्लभ साधना माना जाता है। इसमें साधक चारों दिशाओं में अग्नि प्रज्वलित करते हैं और ऊपर तपते सूर्य को पांचवीं अग्नि के रूप में स्वीकार करते हैं। इसी अग्नि के मध्य बैठकर वे ध्यान, जप और तप में लीन रहते हैं।

मान्यता है कि इस तरह की साधना से मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है और साधक को आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। यह तपस्या केवल शारीरिक सहनशक्ति का ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृढ़ता का भी प्रतीक मानी जाती है।

समूचे समाज के कल्याण की भावना

आयोजकों के अनुसार इस तप का उद्देश्य किसी व्यक्तिगत सिद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे विश्व कल्याण, मानवता की सुख-समृद्धि, पर्यावरण संतुलन तथा समाज में शांति और सद्भाव की कामना है। संतों का मानना है कि जब कोई साधक निस्वार्थ भाव से तप करता है तो उसकी सकारात्मक ऊर्जा पूरे समाज को प्रभावित करती है। इसी भावना के साथ यहां निरंतर अखंड मंत्रोच्चार, हवन और पूजा-अर्चना भी की जा रही है।

प्राचीन परंपरा से जुड़ा है यह तप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंच धूनी तपस्या का उल्लेख प्राचीन ऋषि-मुनियों की तप परंपरा में मिलता है। अनेक संत और योगी विकट परिस्थितियों में इसी प्रकार की साधना करके आत्मज्ञान और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देते रहे हैं। सनातन धर्म में अग्नि को पवित्रता, ऊर्जा और परिवर्तन का प्रतीक माना गया है, इसी कारण अग्नि के मध्य की जाने वाली यह साधना विशेष महत्व रखती है।

दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

दोमुहानी संगम तट पर चल रही इस तपस्या को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। लोग संतों का आशीर्वाद ले रहे हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच ऐसी आध्यात्मिक गतिविधियां लोगों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं।

समाज को प्रेरणा देती साधना

जमशेदपुर में हो रही यह अखंड पंच धूनी तपस्या महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, त्याग, अनुशासन और लोककल्याण की भावना का जीवंत उदाहरण है। अग्नि की तपिश के बीच संतों की यह साधना समाज को यही संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण से कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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