जमशेदपुर के पार्वती घाट पर बना 'देवात्मा उद्यान', अब नन्हें बच्चों को मिलेगी सम्मानजनक अंतिम विदाई झारखंड एक महीने पहले 26
जमशेदपुर के पार्वती घाट परिसर में नवजात से लेकर करीब पांच वर्ष तक के बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए विशेष रूप से देवात्मा उद्यान विकसित किया गया है। फूलों और हरियाली से सजे इस स्थल को इस तरह तैयार किया गया है कि यह श्मशान घाट नहीं, बल्कि एक शांत बगीचे जैसा प्रतीत होता है।

जमशेदपुर का पार्वती घाट वर्षों से शहरवासियों की अंतिम यात्रा का प्रमुख स्थल रहा है। यहां वयस्कों के अंतिम संस्कार के लिए कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, गैस आधारित शवदाह गृह और लकड़ी पर आधारित आधुनिक अंतिम संस्कार व्यवस्था शामिल है। हालांकि लंबे अरसे तक छोटे बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए कोई तय इंतजाम नहीं था। नतीजतन नवजात शिशुओं से लेकर करीब पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों को अलग-अलग जगहों पर दफनाना पड़ता था, जिससे परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती थी।

छोटे बच्चों के लिए विशेष पहल

इसी जरूरत को महसूस करते हुए पार्वती घाट कमेटी ने एक अनूठी पहल की है। इस पहल के तहत पार्वती घाट परिसर में देवात्मा उद्यान का निर्माण किया गया है, जिसे खास तौर पर छोटे बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए विकसित किया गया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नन्हीं आत्माओं को भी सम्मानजनक और व्यवस्थित तरीके से अंतिम विदाई दी जा सके।

कमेटी के सदस्यों का मानना है कि हर व्यक्ति की तरह बच्चों के अंतिम संस्कार के लिए भी एक निश्चित और पवित्र स्थान होना चाहिए, जहां परिवार के लोग शांति और श्रद्धा के साथ अपने बच्चे को विदा कर सकें।

गरिमा के साथ हो अंतिम यात्रा

पार्वती घाट कमेटी के सदस्य भट्ट साहब ने बताया कि देवात्मा उद्यान की परिकल्पना इसी सोच के साथ की गई थी कि छोटे बच्चों के लिए भी ऐसा एक स्थान हो, जहां उनकी अंतिम यात्रा पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो सके।

उन्होंने बताया कि उद्यान में कुल छह ब्लॉक तैयार किए गए हैं। प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 125 बच्चों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। फिलहाल एक ब्लॉक का उपयोग शुरू हो चुका है, जिसमें अब तक लगभग 60 से 70 बच्चों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

देखने में श्मशान घाट नहीं लगता

देवात्मा उद्यान की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक और शांत वातावरण है। जिन पांच ब्लॉकों का अभी इस्तेमाल नहीं हुआ है, वहां रंग-बिरंगे फूल, सजावटी पौधे और आकर्षक बगीचा तैयार किया गया है। हरियाली और फूलों से सजा यह परिसर किसी सामान्य श्मशान घाट जैसा नहीं, बल्कि एक शांत और सुंदर स्मृति स्थल का अहसास कराता है।

कमेटी का मानना है कि ऐसे माहौल में परिजनों को मानसिक संतोष मिलता है और बच्चों की अंतिम विदाई भी सम्मानजनक तरीके से पूरी होती है।

जरूरत के अनुसार बढ़ेगी व्यवस्था

कमेटी के अनुसार, किसी बच्चे के शव को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से नष्ट होने में लगभग पांच वर्ष का समय लगता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ब्लॉकों की संख्या और उनकी क्षमता तय की गई है। भविष्य में जैसे-जैसे आवश्यकता बढ़ेगी, बाकी ब्लॉकों का उपयोग भी शुरू किया जाएगा। इससे लंबे समय तक व्यवस्थित ढंग से अंतिम संस्कार की सुविधा बनी रहेगी।

हर आत्मा सम्मान की हकदार

देवात्मा उद्यान केवल एक संरचना नहीं, बल्कि संवेदनाओं और मानवीय सोच का प्रतीक है। यह पहल उन माता-पिता के दर्द को समझने का प्रयास है, जिन्होंने अपने नन्हे बच्चों को खोया है। पार्वती घाट कमेटी की यह अनूठी पहल समाज को यह संदेश देती है कि जीवन चाहे छोटा हो या बड़ा, हर आत्मा सम्मान और गरिमा की हकदार है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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