जयपुर धमाके से पहले की कहानी: तड़के चार बजे पहुंचे 4 टेम्पो, कुछ घंटों बाद चली गईं 8 जानें राजस्थान एक घंटा पहले 2
जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके में 8 लोगों की मौत हो गई। जांच में सामने आया कि हादसे वाले दिन तड़के दिल्ली से चार टेम्पो में बारूद और पटाखा बनाने का सामान पहुंचा था।

जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक के बाद एक नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस हादसे में 8 लोगों की जान चली गई थी और अब इसकी परतें खुलने के साथ कई गंभीर सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखा बनाने का कच्चा माल एक रिहायशी इलाके तक कैसे पहुंचा और किसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।

हादसे वाले दिन तड़के पहुंचा था बारूद

ताजा खुलासे के अनुसार जिस दिन फैक्ट्री में धमाका हुआ, उसी दिन तड़के करीब 4 बजे दिल्ली से बारूद और पटाखा बनाने का अन्य सामान जयपुर पहुंचा था। बताया जा रहा है कि यह सामान चार बंद लोडिंग टेम्पो में भरकर लाया गया था। हैरान करने वाली बात यह है कि चारों गाड़ियां सीधे उन्हीं फैक्ट्रियों तक पहुंचीं, जिन पर बाद में पुलिस ने कार्रवाई की।

मामले में मिली जानकारी के मुताबिक चारों टेम्पो से अलग-अलग जगहों पर बारूद और दूसरा सामान उतारा गया। कट्टे और सामान खाली करने के तुरंत बाद चारों गाड़ियां वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन वाहनों को एक वैगनआर कार एस्कॉर्ट कर रही थी और बताया जा रहा है कि इस कार को फिरोज चला रहा था।

जहां धमाका हुआ, वहीं उतरा था सबसे कम बारूद

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिस फैक्ट्री में बाद में विस्फोट हुआ, वहां सबसे कम बारूद उतारा गया था। जानकारी के अनुसार फिरोज की फैक्ट्री में कुल 25 कट्टे बारूद के उतारे गए थे। इसके अलावा पटाखे बनाने में काम आने वाली नलकियों के कार्टन भी वहीं खाली किए गए थे।

दो साल से चल रही थी अवैध फैक्ट्री

जांच में पहले ही यह बात सामने आ चुकी है कि खोह नागोरियान इलाके में यह अवैध पटाखा फैक्ट्री पिछले करीब दो साल से चल रही थी। यह फैक्ट्री एक रिहायशी इलाके में मात्र 55 वर्ग गज के मकान में संचालित हो रही थी। और तो और, यह जगह थाने से सिर्फ करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बताई जा रही है।

हादसे के दिन हुए अचानक विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया था। धमाका इतना तेज था कि आसपास के लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। आग और बारूद के चलते कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए।

एफएसएल जांच में मिले अहम संकेत

इस मामले की पड़ताल में जुटी एफएसएल टीम ने शुरुआती स्तर पर कुछ अहम संकेत दिए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि खाना बनाते समय निकली चिंगारी या फिर किसी के स्मोकिंग करने से उठी चिंगारी ने बारूद को आग पकड़वा दी होगी। हालांकि अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है और एजेंसियां हर पहलू को खंगाल रही हैं।

अब जवाब तलाश रही है जांच

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बारूद से भरे चार टेम्पो दिल्ली से जयपुर तक पहुंचे कैसे। दूसरा सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में चल रही इन फैक्ट्रियों तक इतना खतरनाक सामान लगातार पहुंचता रहा और किसी विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। तीसरा सवाल यह भी है कि अगर ब्लास्ट वाले दिन ही बड़ी मात्रा में बारूद पहुंचा था, तो क्या हादसे की भयावहता इसी कारण और बढ़ गई।

खोह नागोरियान धमाके में 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक बच्चा और दो सगे भाई भी शामिल हैं। अब जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क और बारूद की सप्लाई की कड़ी पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच से और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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