मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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मामले की पृष्ठभूमि और धमकी का कारण
नर्मदापुरम में पदस्थ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को मिल रही धमकियों के मामले में पुलिस प्रशासन ने अब कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। यह पूरा विवाद साल 2022 के एक चर्चित मामले से जुड़ा है। उस समय एक ट्रक चालक शेख लाला नजीर अहमद अपने साथियों के साथ कहीं जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोककर गोवंश की तस्करी का आरोप लगाया। यह विवाद जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें शेख लाला नजीर अहमद की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए थे। जज तबस्सुम खान ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर जज की पहचान को निशाना बनाकर धमकियां दी जाने लगीं और फैसले पर आपत्ति जताई गई।
पुलिस का एक्शन और गिरफ्तारी
जज तबस्सुम खान को मिल रही धमकियों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष जानकारी दी है कि इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। नर्मदापुरम पुलिस प्रशासन ने अब महिला जज की सुरक्षा व्यवस्था में भी काफी इजाफा किया है ताकि वे बिना किसी बाहरी दबाव या भय के अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों का ब्यौरा सरकार की ओर से अदालत में रखा गया है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जज को मिली धमकियों के मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ लगातार इसकी निगरानी कर रही है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव ने अदालत में अपना हलफनामा पेश किया।
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस घटना पर गहरी चिंता जाहिर की थी। खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं, बल्कि न्यायिक अधिकारियों के निर्भीक होकर काम करने की क्षमता को भी कमजोर करती हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि कानून में हर व्यक्ति को फैसलों को चुनौती देने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में जज को धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अन्य न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा का मुद्दा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि महिला जज को अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। साथ ही, सरकार ने राज्य के अन्य जिलों में न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ हो रही ऐसी धमकियों और उन मामलों में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। अदालत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय प्रणाली से जुड़े अधिकारियों को भयमुक्त वातावरण मिले। 9 जुलाई 2026 को इस मामले में हुई सुनवाई में पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा के इंतजामों को प्रमुखता से दर्ज किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से अब कानून का डर कायम करने की कोशिश की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी न्यायिक अधिकारी को निशाना न बना सके।
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