अमेरिकी सेना की मेजबानी करने वाले देशों को ईरान की खुली धमकी, कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा विश्व एक महीने पहले 40
ईरान की सेना IRGC ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले देशों को गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी जारी की है, जिसके बाद कुवैत में मिसाइल हमलों और खाड़ी में तनाव बढ़ने की खबरें हैं।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की शक्तिशाली सैन्य शाखा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने उन तमाम देशों को सीधे तौर पर चेतावनी दी है जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी बलों की मेजबानी करने वाले देशों को किसी भी 'उचित जवाबी कार्रवाई' का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। ईरानी सैन्य संगठन ने इन देशों से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।

नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने का निर्देश

ईरान ने उन देशों को कड़े लहजे में आगाह किया है जिन्होंने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए होने दिया है। IRGC ने इन देशों के प्रशासन से अपील की है कि वे अपनी नागरिक सुरक्षा प्रणालियों को तुरंत सक्रिय करें। इसके साथ ही, आम नागरिकों को किसी भी संभावित सैन्य ठिकाने से दूर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने की सलाह दी गई है ताकि हमलों की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले का दावा

चेतावनी जारी करने के साथ ही ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने का भी दावा किया है। IRGC का कहना है कि उसने अपनी इस चेतावनी के तहत पहला कदम उठाते हुए कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक केंद्र 'कैंप अरिफजान' पर मिसाइलों और ड्रोन्स से बड़ा हमला किया है। ईरानी सेना का दावा है कि इस हमले में वहां तैनात कई अमेरिकी सैन्यकर्मी हताहत हुए हैं।

इसके अलावा, IRGC ने कुवैत के 'अली अल सलेम एयर बेस' को भी निशाना बनाने की बात कही है। उनके अनुसार, इस हमले में एयर बेस की रडार प्रणाली को पूरी तरह ठप कर दिया गया, जबकि हथियारों के रखरखाव वाले हैंगर और ड्रोन संचालन सुविधा को भारी नुकसान पहुंचाते हुए नष्ट कर दिया गया। हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा टकराव, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल

शनिवार को भी खाड़ी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलाबारी और सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के कारण हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां एक अस्थायी युद्धविराम के टूटने के बाद से ही दोनों सेनाएं आमने-सामने हैं।

वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होने के कारण, इस अशांति का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मच गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।

अमेरिका की भारी बमबारी और रक्षात्मक कार्रवाई

इस पूरे टकराव में अमेरिकी सेना लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। अमेरिकी हमलों में मुख्य रूप से ईरान के रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिसके जवाब में ईरान की तरफ से खाड़ी क्षेत्र में मिसाइलें और ड्रोन दागे जा रहे हैं। कुवैत ने शनिवार को घोषणा की कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रहे ईरान के कई ड्रोन्स और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं, संभावित खतरों को देखते हुए बहरीन में भी हवाई हमले के अलर्ट वाले सायरन बजाए गए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने लगातार 7वीं रात भी अपना हवाई अभियान जारी रखा। इन हमलों के दौरान अमेरिकी विमानों ने ईरान के निगरानी केंद्रों, सैन्य रसद ढांचों, भूमिगत हथियारों के भंडारों और उनकी समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर दिया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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