शेयर बाजार: ईरान विवाद, कच्चे तेल के दाम और FIIs की बिकवाली—अगले हफ्ते किस ओर जाएगा भारतीय बाजार? व्यापार 2 घंटे पहले 2
बीते सप्ताह दो हफ्ते की गिरावट तोड़कर निफ्टी और सेंसेक्स मजबूती से बंद हुए। अगले हफ्ते अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की चाल बाजार की दिशा तय करेंगी।

घरेलू शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बावजूद जोरदार वापसी दर्ज की और लगातार दो हफ्तों से जारी गिरावट के सिलसिले पर ब्रेक लगा दिया। वैश्विक मोर्चे से मिले सकारात्मक संकेतों, विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों और निवेशकों के बढ़ते भरोसे की बदौलत बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। अब सबकी निगाहें आने वाले सप्ताह पर लगी हैं, जहां ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों (FIIs) की सक्रियता बाजार का रुख तय कर सकती है।

बीते सप्ताह बाजार का प्रदर्शन

हफ्ते के समापन पर निफ्टी 1.10 फीसदी चढ़कर 23,622.90 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं सेंसेक्स 1.73 फीसदी की उछाल के साथ 75,527.95 पर पहुंच गया। इस तेजी ने निवेशकों का हौसला बढ़ाया और बाजार में खरीदारी का सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी रहेंगी निगाहें

विशेषज्ञों का आकलन है कि आगामी सप्ताह में निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से जुड़ी हर खबर पर बारीकी से नजर रखेंगे। दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत भले मिल रहे हों, लेकिन बाजार किसी औपचारिक ऐलान का इंतजार करता रहेगा। यदि समझौता सिरे चढ़ता है तो वैश्विक तनाव में कमी आ सकती है और निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। दूसरी ओर, अगर बातचीत अटकती है या तनाव गहराता है तो बाजार में दोबारा उथल-पुथल लौट सकती है।

कच्चे तेल की कीमतें बनेंगी अहम कारक

बाजार जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम सबसे बड़े निर्णायक साबित हो सकते हैं। अगर तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं या और गिरती हैं तो यह भारत के लिए राहत भरी खबर होगी, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल को लेकर बनी चिंता हल्की पड़ेगी। इसके उलट, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और तेल महंगा होने की सूरत में इसका सीधा झटका भारतीय शेयर बाजार को लग सकता है।

FIIs की गतिविधियों पर रहेगा फोकस

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली पिछले कुछ अरसे से बाजार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है, हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी बाजार को सहारा देती रही है। जानकारों का कहना है कि अगर FIIs की बिकवाली थमती है या वे दोबारा खरीदारी की ओर लौटते हैं, तो बाजार को बड़ा सहारा मिल सकता है। इसके साथ ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान भी अहम भूमिका निभाएंगे।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!