झारखंड
3 घंटे पहले
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विचारों
झारखंड के देवघर जिले के गोपीडीह गांव के रहने वाले किसान दुखन कापड़ी आज क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। कभी अपनी जमीन पर झींगा, कद्दू और भिंडी जैसी पारंपरिक फसलें उगाने वाले इस किसान ने मिर्च की खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को नई दिशा दे दी है। एक एकड़ जमीन पर की गई इस खेती से उन्हें लाखों रुपये की आमदनी हुई है।
एक समय ऐसा भी था जब परंपरागत फसलों से उन्हें सामान्य आमदनी तो हो जाती थी, लेकिन मेहनत के मुकाबले मुनाफा बहुत कम रह जाता था। बढ़ती लागत और बाजार में कीमतों के लगातार उतार-चढ़ाव ने उनके सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। ऐसे हालात में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी और अपनी खेती के तरीके में बदलाव लाने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने एक एकड़ जमीन पर मिर्च की खेती शुरू की। शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें इसके जोखिम गिनाए, मगर उन्होंने हार नहीं मानी और पूरे आत्मविश्वास के साथ इस काम में जुट गए।
बेहद कम लागत में हुई शुरुआत
मिर्च की खेती दुखन कापड़ी ने बहुत कम पूंजी के साथ शुरू की। सही समय पर खेत की तैयारी, अच्छी किस्म के पौधों का चुनाव और नियमित देखभाल का असर जल्द ही दिखने लगा। पौधों की बढ़वार बेहतर रही और खेत में मिर्च की भरपूर पैदावार हुई। फसल तैयार होने और बाजार में बिक्री शुरू होते ही उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा फायदा मिला।
जिस खेती की शुरुआत उन्होंने मामूली निवेश से की थी, उसी ने उन्हें लगभग दो लाख रुपये की आमदनी दिला दी। उपज की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण व्यापारियों ने भी अच्छे दामों पर इसे खरीदा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और खेती को लेकर उनका भरोसा और गहरा हो गया।
क्या कहते हैं किसान
दुखन कापड़ी बताते हैं कि वे पिछले 40 वर्षों से खेती कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने तरह-तरह की फसलें उगाईं, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा उन्हें मिर्च की खेती से ही हुआ। उनका मानना है कि अगर किसान सही तकनीक अपनाएं तो मिर्च की खेती बेहद लाभदायक साबित हो सकती है।
उनका कहना है कि खेती में सिर्फ मेहनत ही काफी नहीं, बल्कि सही योजना, तकनीकी जानकारी और बाजार की मांग को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने अपनी कामयाबी से यह दिखा दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलें उगाकर किसान अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज उनके खेत को देखने और मिर्च की खेती की जानकारी लेने के लिए आसपास के गांवों से किसान पहुंच रहे हैं।
दूसरे किसानों के लिए संदेश
दुखन कापड़ी की यह सफलता उन तमाम किसानों के लिए बड़ा संदेश है जो कम आमदनी और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और नए प्रयोगों ने साबित कर दिया है कि आधुनिक सोच और नई तकनीकों को अपनाकर खेती से बेहतर कमाई की जा सकती है। आज वे न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं, बल्कि क्षेत्र के दूसरे किसानों को आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखा रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि सही फसल का चयन और पूरी लगन हो, तो खेत ही किसान की किस्मत बदल सकता है।
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