मौसमी के बाग में कुरथी की खेती, खाली जमीन का स्मार्ट इस्तेमाल दिलाएगा किसानों को दोहरा मुनाफा झारखंड एक घंटा पहले 4
पलामू के एक प्रगतिशील किसान सतीश दुबे ने मौसमी के बागों में इंटरक्रॉपिंग के जरिए कुरथी की खेती शुरू की है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के साथ पशुओं के लिए चारे की समस्या से भी निजात मिल रही है।

खेती के नए प्रयोग से किसानों की बढ़ेगी आय

आज के समय में खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए नवाचार की बहुत आवश्यकता है। पलामू जिले के रहने वाले किसान सतीश दुबे ने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। वे अपनी बागवानी की जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय उसका स्मार्ट इस्तेमाल कर रहे हैं। सतीश दुबे अपने मौसमी के बाग में कुरथी की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें न केवल व्यावसायिक लाभ हो रहा है, बल्कि मवेशियों के चारे की चिंता भी खत्म हो गई है। यह तरीका अन्य किसानों के लिए भी आय का नया जरिया बन सकता है।

चार एकड़ में फैला है मौसमी का बाग

सतीश दुबे ने बताया कि उन्हें खेती का काम विरासत में मिला है और वे इसे आधुनिक तरीके से कर रहे हैं। उन्होंने करीब चार एकड़ जमीन पर मौसमी का बाग लगाया है। बागवानी के नियमों का पालन करते हुए उन्होंने मौसमी के पौधों के बीच 10-10 फीट की दूरी रखी है। चूंकि मौसमी के पौधे अभी पूरी तरह से बड़े नहीं हुए हैं, इसलिए उनके बीच काफी जगह खाली पड़ी थी। इस खाली जमीन को बेकार न छोड़ते हुए सतीश ने इंटरक्रॉपिंग की तकनीक अपनाने का निर्णय लिया और कुरथी की बुआई शुरू कर दी।

खरपतवार पर लगा लगाम और अतिरिक्त फसल

बाग में पौधों के बीच खाली जगह होने के कारण वहां घास और अनावश्यक खरपतवार बहुत तेजी से उग रहे थे। इसे नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती थी। सतीश ने इसका हल ढूंढ लिया। उन्होंने जमीन की अच्छी तरह से जुताई कराई और फिर वहां कुरथी की खेती शुरू कर दी। इस कदम के दो बड़े फायदे हुए। पहला, खेत में घास उगने की समस्या काफी हद तक कम हो गई। दूसरा, खाली पड़ी जमीन से किसान को एक अतिरिक्त फसल भी मिल गई। सतीश को उम्मीद है कि कुरथी की यह फसल लगभग दो महीने के भीतर पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।

पशुपालकों के लिए भी वरदान

सतीश दुबे के पास 8 से 10 गायें हैं। उनके लिए चारे का प्रबंध करना एक बड़ी जिम्मेदारी थी। कुरथी की खेती से उन्हें इस समस्या का समाधान मिल गया है। किसान के अनुसार, कुरथी की फसल के अवशेष और उसका भूसा उनके मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे का काम करेंगे। विशेषकर ठंड के मौसम में पशुओं के लिए सूखा चारा बहुत फायदेमंद होता है। इस तरह उन्हें बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और घर पर ही चारे की आपूर्ति बनी रहेगी।

आर्थिक लाभ की उम्मीद

कुरथी एक दलहनी फसल है, जिसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। सतीश को उम्मीद है कि चार एकड़ मौसमी के बाग से उन्हें करीब 10 से 12 क्विंटल कुरथी का उत्पादन मिलेगा। इस उपज का एक हिस्सा वे अपनी घरेलू जरूरतों के लिए इस्तेमाल करेंगे, जबकि शेष भाग को बाजार में बेचकर अच्छी अतिरिक्त कमाई भी करेंगे।

आलू की खेती की भी योजना

सतीश दुबे की योजना केवल यहीं तक सीमित नहीं है। वे अपनी जमीन के हर इंच का सदुपयोग करने पर जोर दे रहे हैं। जैसे ही कुरथी की फसल की कटाई पूरी हो जाएगी, वे उसी जमीन पर आलू की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। इस तरह मौसमी के पौधों के बीच की खाली जगह का साल भर उपयोग करके वे एक ही खेत से कई फसलें लेने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यह एकीकृत खेती का मॉडल पलामू के अन्य बागवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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