सिंधु जल संधि पर सख्त हुआ भारत, अमित शाह खुद रख रहे नजर, पाकिस्तान को नहीं मिलेगी एक बूंद भी राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 21
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि आने वाले सालों में पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली से पानी की एक बूंद भी नहीं मिलने दी जाएगी और गृह मंत्री अमित शाह स्वयं इस पूरे मामले पर निगरानी रख रहे हैं।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को साफ कर दिया कि नरेंद्र मोदी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को सिंधु नदी प्रणाली से किसी भी तरह का पानी न मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को रद्द नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल इसे स्थगित रखा गया है और सीमा पार पानी के प्रवाह को रोकने की कोशिशें जारी हैं।

'एक बूंद भी नहीं जाएगी'

पाटिल ने कहा, “यह संधि अब भी कायम है; बस इसे फिलहाल रोक दिया गया है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने यह निर्णय लिया है, तभी से हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि वहां पानी की एक बूंद भी न पहुंचे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के शीर्ष स्तर पर इस विषय पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री के निर्देशों के तहत गृह मंत्री अमित शाह भी व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं और हम इस पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। मेरा मानना है कि काम तय समय-सीमा के भीतर ही आगे बढ़ रहा है। यह तय है कि आने वाले सालों में पानी की एक बूंद भी नहीं जाएगी; इतना तो मैं आपको जरूर बता सकता हूं।”

संधि कब हुई थी स्थगित

भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, के अगले ही दिन पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों के तहत 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी तथा उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है। मंत्री के ताजा बयान पहलगाम हमले और उसके बाद संधि रोकने के फैसले से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बीच आए हैं।

मध्यस्थता अदालत के फैसले को भारत ने नकारा

इससे पहले विदेश मंत्रालय ने संधि के तहत बनी मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) के अधिकार क्षेत्र को मानने से इनकार कर दिया था। “अधिकतम पोंडेज” (maximum pondage) के मुद्दे पर ट्रिब्यूनल के हालिया फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस अदालत को गैर-कानूनी तरीके से गठित मानता है और उसके किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेगा।

जायसवाल ने कहा, “भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने गैर-कानूनी रूप से गठित CoA (मध्यस्थता अदालत) के पहले के सभी फैसलों को मजबूती से नकारा था।” उन्होंने ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किसी भी कार्यवाही, फैसले या निर्णय को “अमान्य और शून्य” (null and void) बताया।

भारत लंबे समय से यह दलील देता रहा है कि यह मध्यस्थता तंत्र संधि का उल्लंघन करते हुए बनाया गया था। उसने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रातले जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े विवादों पर इस अदालत के अधिकार क्षेत्र को भी चुनौती दी है।

पाकिस्तान में गहराता जल संकट

इस बीच पाकिस्तान में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं तेजी से बढ़ी हैं। कराची इस समय पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है और खबरों के अनुसार शहर के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में पानी की आपूर्ति बाधित है। वहां के राजनीतिक नेताओं ने इस संकट के लिए प्रशासनिक नाकामियों को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि पाकिस्तान सिंधु प्रणाली के तहत भविष्य के जल प्रवाह को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सामना कर रहा है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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