जब इंदौर में साइकिल चलाने के लिए चाहिए होता था लाइसेंस और नंबर प्लेट, जानें यह दिलचस्प इतिहास मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
होलकर रियासत के दौर में इंदौर में साइकिल चलाने के लिए लाइसेंस और नंबर प्लेट जरूरी थी। साल 1918 में यहां साइकिलों का पंजीकरण शुरू हुआ और 1929 में जारी एक लाइसेंस आज भी सुरक्षित है।

आज के समय में साइकिल चलाना बेहद आसान काम है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब इंदौर में इसके लिए नियम-कायदों का पालन करना पड़ता था। होलकर रियासत के समय में साइकिल चलाने वाले को लाइसेंस लेना अनिवार्य था और हर साइकिल पर नंबर प्लेट भी लगानी होती थी। बिना लाइसेंस और पंजीकरण के साइकिल चलाने की इजाजत नहीं दी जाती थी।

स्वच्छता और अर्थव्यवस्था के लिए मशहूर शहर

इंदौर अपनी स्वच्छता के लिए देशभर में पहचाना जाता है और इसे मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है। मौजूदा दौर में चार पहिया और दो पहिया वाहन चलाने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता है, जबकि साइकिल के लिए किसी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं रह गई है। लेकिन होलकर रियासत के समय इंदौर में साइकिल चलाने के लिए लाइसेंस और नंबर प्लेट दोनों जरूरी थे।

लाइसेंस से पहले दिखानी पड़ती थी साइकिल

उस दौर में साइकिल का लाइसेंस लेने वाले व्यक्ति को पहले अपनी साइकिल दिखानी पड़ती थी, इसके बाद ही उसका लाइसेंस तैयार किया जाता था। इतिहासकार जफर अंसारी के संग्रहालय में आज भी 1929 में साइकिल चलाने के लिए बनाया गया एक लाइसेंस सुरक्षित है, जिसे इंदौर नगर पालिका ने जारी किया था।

इतिहासकार बताते हैं कि शहर का पहला साइकिल शोरूम 1918 में छावनी क्षेत्र में खुला था। उस समय बच्चों की साइकिल पांच पैसे और बड़ों की साइकिल 10 पैसे प्रति घंटे के किराए पर मिल जाया करती थी।

1918 में शुरू हुआ था पंजीकरण

रिपोर्ट के अनुसार, साल 1918 में इंदौर राज्य में साइकिलों का पंजीकरण शुरू किया गया था। उस समय साइकिल को आवागमन का एक अहम साधन माना जाता था और इसके संचालन के लिए बाकायदा नियम बनाए गए थे। आज भले ही मोटर वाहनों का बोलबाला हो, फिर भी इंदौर के लोगों में साइकिल के प्रति लगाव आज भी कायम है। सेहत, फिटनेस और पर्यावरण की रक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता के चलते शहर में एक बार फिर साइकिल संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।

सेहत के लिए फायदेमंद है साइकिल चलाना

साइकिल चलाना सबसे सरल, किफायती और असरदार व्यायाम माना जाता है। इसे नियमित रूप से करने पर शरीर और मन दोनों को कई लाभ मिलते हैं। इससे हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है और रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है।

इसके साथ ही साइकिल चलाना वजन घटाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी कारगर साबित होता है। इससे ईंधन की बचत तो होती ही है, साथ ही मन भी तरोताजा बना रहता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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