गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी राहत, ट्रेन में अब ऑनलाइन लोअर बर्थ बुक करना हुआ आसान राष्ट्रीय राजनीति 4 घंटे पहले 2
रेलवे बोर्ड ने गर्भवती महिलाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से लोअर बर्थ बुक करने की विशेष सुविधा दी है। इस निर्णय से अब यात्रियों को डॉक्टर का सर्टिफिकेट दिखाने की अनिवार्यता से भी बड़ी राहत मिली है।

गर्भवती यात्रियों के लिए रेलवे का बड़ा कदम

भारतीय रेलवे ने ट्रेन में सफर करने वाली गर्भवती महिलाओं को एक बड़ी राहत प्रदान करते हुए नई नीति को मंजूरी दे दी है। अब गर्भवती महिलाएं न केवल ऑफलाइन बल्कि ऑनलाइन माध्यम से भी लोअर बर्थ की सुविधा के लिए अपनी सीट आरक्षित कर सकेंगी। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को स्वीकार करते हुए रेलवे बोर्ड ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें यात्रा के दौरान असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। अब तक, गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ सुनिश्चित करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था और उन्हें बार-बार कोच में ऊपर की सीटों पर चढ़ने और नीचे उतरने की शारीरिक परेशानी से जूझना पड़ता था। इस नई व्यवस्था के लागू होने से उनके सफर को और भी अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रयास किए गए हैं।

प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त

पूर्व में, रेलवे की इस कोटा सुविधा का लाभ उठाने के लिए गर्भवती महिलाओं को आरक्षण केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से जाकर आवेदन करना होता था। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बुकिंग के समय ही उन्हें एक रजिस्टर्ड डॉक्टर द्वारा जारी किया गया मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से जमा करना पड़ता था। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने अपने ताजा आदेश में यह शर्त हटा दी है। अब बुकिंग करते समय किसी भी प्रकार का मेडिकल प्रमाण या दस्तावेज दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव यात्रियों के लिए बेहद सुविधाजनक साबित होगा, क्योंकि उन्हें अब केवल कागजी कार्यवाही के लिए आरक्षण कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने होंगे।

सिस्टम में होगा बड़ा तकनीकी बदलाव

रेलवे बोर्ड ने 28 सितंबर को जारी अपने आधिकारिक आदेश में कहा है कि गर्भवती महिलाओं को भी वरिष्ठ नागरिकों और 45 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिला यात्रियों की भांति ही संयुक्त लोअर बर्थ कोटे के अंतर्गत रखा जाएगा। इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए बोर्ड ने सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स यानी CRIS और IRCTC को निर्देश दिए हैं। इन संस्थाओं को अपने संबंधित ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप में आवश्यक सॉफ्टवेयर संशोधन करने होंगे। हालांकि, यात्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस घोषणा का अर्थ यह नहीं है कि सुविधा आज से ही वेबसाइट पर दिखने लगी है। जब तक CRIS और IRCTC पूरी तरह से तकनीकी अपडेट का काम पूरा नहीं कर लेते, तब तक उपयोगकर्ताओं को लोअर बर्थ चुनने का ऑनलाइन विकल्प दिखाई नहीं देगा। बोर्ड ने इस दिशा में तेजी से काम करने को कहा है, ताकि जल्द से जल्द महिलाएं घर बैठे इसका लाभ ले सकें।

दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई का असर

रेलवे का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इस विषय को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। अदालत में इस बात पर बहस चल रही थी कि क्यों गर्भवती महिलाओं को ऑनलाइन बुकिंग के समय लोअर बर्थ का चयन करने का विकल्प नहीं दिया जा रहा है। कानूनी प्रक्रिया और महिलाओं की सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए, रेलवे बोर्ड ने आखिरकार इस व्यवस्था को अपडेट करने का फैसला लिया है। यह एक ऐसा मामला है जो सीधे तौर पर यात्रियों की सुविधा और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से जुड़ा हुआ था।

लोअर बर्थ का कोटा और वितरण

रेलवे के नियमों के अनुसार, ट्रेनों में विशिष्ट श्रेणियों के लिए लोअर बर्थ का एक निश्चित कोटा निर्धारित होता है। यह कोटा उपलब्धता के आधार पर आवंटित किया जाता है। ट्रेनों के विभिन्न वर्गों में सीटों का वितरण इस प्रकार है:

  • स्लीपर क्लास: प्रत्येक कोच में लगभग 6 से 7 लोअर बर्थ का प्रावधान है।
  • AC 3 टियर: हर कोच में करीब 4 से 5 लोअर बर्थ आवंटित रहती हैं।
  • AC 2 टियर: इसमें प्रत्येक कोच में 3 से 4 लोअर बर्थ निर्धारित होती हैं।

वरिष्ठ नागरिकों और 45 साल से अधिक आयु की महिलाओं को अक्सर प्राथमिकता के आधार पर ये सीटें मिलती हैं। अब इसी कोटे में गर्भवती महिलाओं को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे लोअर बर्थ पाने वालों की सूची का दायरा बढ़ गया है।

दस्तावेज नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई

रेलवे ने हालांकि बुकिंग के समय सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म कर दी है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि यात्री को कोई प्रमाण साथ नहीं रखना है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यात्रा के दौरान टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा पात्रता का प्रमाण मांगा जा सकता है। ऐसी स्थिति में महिला यात्री को अपनी स्थिति सिद्ध करने के लिए आवश्यक दस्तावेज दिखाने होंगे। यदि यात्री कोई भी वैध दस्तावेज पेश करने में असमर्थ रहती है, तो रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 138 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अतः यात्रियों को यही सलाह दी जाती है कि वे अपने साथ गर्भावस्था से संबंधित मेडिकल दस्तावेज अनिवार्य रूप से रखें ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी या दंड से बचा जा सके।

दिव्यांग यात्रियों के लिए भी सुरक्षा

इस नई नीति के साथ ही रेलवे ने दिव्यांग यात्रियों के लिए पहले से मौजूद व्यवस्थाओं को भी बनाए रखा है। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर और 3AC/3E श्रेणी में चार-चार बर्थ विशेष रूप से निर्धारित हैं, जिनमें दो लोअर बर्थ शामिल होती हैं। साथ ही, आरक्षित सेकंड सिटिंग और AC चेयर कार में भी चार सीटों का प्रावधान दिव्यांगों के लिए किया गया है। कुल मिलाकर, रेलवे का यह प्रयास अधिक समावेशी और सुविधाजनक यात्रा अनुभव देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अब केवल IRCTC और CRIS के तकनीकी अपडेट का इंतजार है, जिसके बाद करोड़ों गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिल जाएगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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