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8 घंटे पहले
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खटीमा में मुख्यमंत्री का विशेष दौरा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को उत्तराखंड के खटीमा स्थित गोसीकुआ भुड़ाई के आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा किया। यहाँ आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने न केवल स्थानीय लोगों से भेंट की, बल्कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं के क्रियान्वयन को भी करीब से परखा। इस दौरान उन्होंने बच्चों, वहां मौजूद माताओं, गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया।
बच्चों के साथ साझा किए पल
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग और भावुक रूप देखने को मिला। उन्होंने नन्हे-मुन्ने बच्चों को दुलार किया और उनके साथ बैठकर उनके मन की बातें जानी। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को भोजन परोसा और उनके साथ आत्मीयता से समय बिताया। इस अवसर पर उन्होंने 05 छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न करवाया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाते हुए, उन्होंने गोदभराई की रस्म में हिस्सा लिया और 10 गर्भवती महिलाओं को आशीर्वाद देते हुए उन्हें पौष्टिक आहार की किट सौंपी। इसके अलावा, 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट प्रदान की गई और 09 आंगनबाड़ी तथा 02 आशा कार्यकर्ताओं को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समृद्धि और हरियाली का प्रतीक माने जाने वाले पौधे का रोपण भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों की यात्रा का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह लंबा सफर देशवासियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। राष्ट्रहित में लिए गए उनके बड़े फैसलों और एक कर्मयोगी के रूप में उनकी कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए धामी ने उनके समर्पण भाव की जमकर प्रशंसा की।
‘आंगन मिलन’ सेवा और संवाद का माध्यम
मुख्यमंत्री ने ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम को सेवा, स्नेह और संवाद का एक सेतु बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं ताकि सरकार सीधे आम लोगों से जुड़ सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों के बेहतर भविष्य, प्रारंभिक शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के आधार स्तंभ हैं। अपनी व्यक्तिगत यादें ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके अपने बच्चे भी नगला तराई के आंगनबाड़ी केंद्र में ही पढ़कर बड़े हुए हैं, जो उनकी इन केंद्रों के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।
माताओं और बच्चों की सेहत प्राथमिकता
राज्य सरकार की नीतियों के बारे में चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि माताओं और शिशुओं का स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। महालक्ष्मी किट योजना, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना और अन्य पोषण संबंधित कार्यक्रमों का उद्देश्य ही यही है कि किसी को भी आवश्यक सहायता से वंचित न रहना पड़े। सरकार दुर्गम इलाकों में प्रसव के लिए बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था कर रही है और आपातकालीन स्थितियों में हेली एंबुलेंस जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए महिलाओं को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच दिया जा रहा है ताकि प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान बच्चों को उचित पोषण और संस्कार मिल सकें।
कुपोषण मुक्त उत्तराखंड का संकल्प
मुख्यमंत्री ने अंत में अपनी सरकार का ध्येय स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे, यह सरकार का विकल्परहित संकल्प है। पोषण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी तंत्र की नहीं है, बल्कि समाज और परिवार को भी इसमें बराबर की भागीदारी निभानी होगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वे सरकार की नीतियों को धरातल पर उतारने में एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम कर रही हैं। जब समाज, परिवार और सरकार एक साथ मिलकर काम करेंगे, तभी एक स्वस्थ और सशक्त उत्तराखंड का सपना पूर्ण हो सकेगा।
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