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एक घंटा पहले
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एशिया-पैसिफिक में बढ़ता हथियारों का खतरा
दुनियाभर में सुरक्षा के हालात तेजी से बदल रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे युद्ध और उसके बाद ईरान क्षेत्र में शुरू हुई जंग ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इन वैश्विक घटनाक्रमों के बीच चीन का आक्रामक रवैया पड़ोसी देशों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस और जापान जैसे देश बीजिंग की सैन्य गतिविधियों से अपनी सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति के चलते एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में हथियारों की एक नई दौड़ शुरू हो गई है।
जापान का बड़ा कदम
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद वाशिंगटन की मित्र देशों के प्रति नीति में बदलाव देखा गया है। ऐसे में जापान जैसे देशों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया है। इसी क्रम में जापान ने अपनी सामरिक ताकत में जबरदस्त इजाफा करते हुए एक नई हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है। इस मिसाइल की गति मैक-5 यानी करीब 6200 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक है। यदि इस हथियार की गति को मैक-5 मानकर चलें, तो यह केवल 20 मिनट के भीतर बीजिंग को निशाना बना सकती है। यह मिसाइल न केवल जापान की रक्षा क्षमता को मजबूती देगी, बल्कि चीन के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगी, क्योंकि वर्तमान में दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इतनी तेज गति वाली मिसाइल को रोकने में सक्षम नहीं है।
ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन
जापान ने पहली बार अपने Type 25 Hyper Velocity Gliding Projectile को एक सक्रिय ऑपरेशनल स्थिति में दिखाया है। कैंप फूजी में सामने आए एक हालिया वीडियो में जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के जवानों को इस हथियार प्रणाली को फायरिंग पोजीशन पर ले जाते, लॉन्चर को तैयार करते और फिर वापस हटते देखा गया। यह दृश्य जापान के स्वदेशी हाई-स्पीड ग्लाइड वेपन की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी का अब तक का सबसे स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है। वीडियो में 8x8 रोड-मोबाइल लॉन्चर पर दो बड़े मिसाइल कंटेनर स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि यह प्रणाली कितनी गतिशील है और बहुत कम समय में लॉन्च के लिए तैयार हो सकती है।
दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को मात देने में सक्षम
Type 25 मिसाइल को आधिकारिक रूप से 31 मार्च को जापानी सेना में शामिल किया गया था। यह पहला मौका है जब जापान ने घरेलू स्तर पर निर्मित स्टैंड-ऑफ मिसाइलों को अपनी सेल्फ-डिफेंस फोर्स की यूनिट को सौंपा है। रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के अनुसार, यह हथियार जापान को दुश्मन की सीमा में सीधे प्रवेश किए बिना उनके सैन्य बलों को निशाना बनाने में सक्षम बनाएगा। इसे विशेष रूप से जापान के सुदूर द्वीपों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाया गया है। पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से अलग, यह मिसाइल रॉकेट बूस्टर की मदद से ऊंचाई तक जाती है और फिर ग्लाइड व्हीकल अलग होकर अत्यंत तीव्र गति से लक्ष्य की ओर बढ़ता है। अपने उड़ान पथ को अंतिम समय में बदलने की क्षमता के कारण, मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना नामुमकिन जैसा है।
ब्रह्मोस के साथ तुलना
जापान की नई मिसाइल की तुलना भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल से भी की जा रही है। हालांकि जापान ने अभी तक Type 25 की सटीक मारक दूरी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। वहीं, ब्रह्मोस की निर्यात सीमा 290 किलोमीटर है, जबकि इसका भारतीय संस्करण करीब 500 किलोमीटर तक मार कर सकता है। ब्रह्मोस की गति मैक-3 से मैक-3.5 है, जबकि जापानी मिसाइल मैक-5 की गति हासिल कर लेती है। इस प्रकार, गति और रेंज के मामले में यह मिसाइल ब्रह्मोस से दोगुनी घातक साबित हो रही है।
भविष्य की रणनीति और चुनौतियां
जापान के 2026 डिफेंस व्हाइट पेपर के अनुसार, सरकार अब अलग-अलग दूरी और फ्लाइट प्रोफाइल वाली स्टैंड-ऑफ मिसाइलों के उत्पादन में तेजी ला रही है। Type 25 का विकास ऐसे दौर में हुआ है जब चीन की नौसैनिक और वायुसेना की बढ़ती ताकत जापान के लिए रणनीतिक सिरदर्द बनी हुई है। इस तरह के लंबी दूरी के ग्लाइड हथियार जापान को यह ताकत देते हैं कि वह अपने युद्धपोतों या विमानों को खतरे में डाले बिना दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद कर सके। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को सेवा में शामिल करने के साथ ही जापान अब रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के बाद ऐसा करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है।
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