राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
ईरान और अमेरिका के बीच हुई शांति डील का श्रेय लेने की होड़ में पाकिस्तान मानो अपना संतुलन ही खो बैठा है। इस समझौते के उत्साह में वह इस गलतफहमी में जीने लगा है कि अब वह एक वैश्विक शक्ति बन चुका है। इसी अति आत्मविश्वास के चलते उसने एक बार फिर भारत के खिलाफ नापाक हरकत शुरू कर दी है।
इसी क्रम में पुंछ के बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने भारतीय चौकियों पर फायरिंग कर दी। बदलते कूटनीतिक और घरेलू हालात के बीच पाकिस्तान दोबारा भारत को उकसाने में जुट गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ीं उकसावे की घटनाएं
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की ओर से लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांति बनी रही थी। हालांकि बीते कुछ दिनों में ड्रोन गतिविधियों और गोलीबारी की घटनाओं में इजाफा देखा गया है। चार दिन पहले मेंढर सेक्टर में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन की मौजूदगी और अब बालाकोट में हुई गोलीबारी को इसी सिलसिले की कड़ी माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश में पाकिस्तान अक्सर भारत के साथ तनाव को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। ईरान-अमेरिका संवाद की प्रक्रिया में अपनी भूमिका को लेकर पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान और सैन्य नेतृत्व में उत्साह का माहौल है। संभव है कि इसी आत्मविश्वास ने उसे यह जताने के लिए उकसाया हो कि वह आज भी क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित करने की ताकत रखता है।
क्या आंतरिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश?
हकीकत यह है कि पाकिस्तान इस समय गंभीर आंतरिक चुनौतियों से भी जूझ रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में जनता सड़कों पर है और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर वहां की जनता में भारी आक्रोश है।
ऐसे माहौल में भारत के खिलाफ सीमा पर तनाव खड़ा करना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति रही है, ताकि घरेलू समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।
भारत के करारे जवाब ने मंसूबों पर फेरा पानी
लेकिन इस बार बालाकोट सेक्टर में भारत की प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान के इरादों पर पानी फेर दिया। भारतीय सेना ने न सिर्फ जवाबी कार्रवाई की, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि सीमा पर किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सैन्य सूत्रों के अनुसार भारत का जवाब इतना प्रभावी रहा कि पाकिस्तानी चौकियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।
संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। कूटनीतिक मंचों पर मिली किसी भी कथित कामयाबी के नशे में अगर पाकिस्तान सीमा पर दुस्साहस दिखाने की कोशिश करेगा, तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा। बालाकोट की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि नया भारत उकसावे को नजरअंदाज नहीं करता, बल्कि उसका निर्णायक जवाब देता है।
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