राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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होर्मुज से लेकर लाल सागर तक के अहम समुद्री मार्ग इन दिनों लगातार हमलों की चपेट में हैं। कभी आपसी टकराव तो कभी बड़ी ताकतों के दबाव के चलते इन रास्तों पर तेल और जरूरी सामान की आपूर्ति बार-बार रुक जाती है। इसी मुश्किल से निकलने के लिए भारत ने अब ऐसी व्यवस्था कर ली है, जिसमें तेल की निरंतर आपूर्ति के लिए वह सिर्फ एक मार्ग पर निर्भर नहीं रहेगा।
रूस के साथ बने 'INSTC कॉरिडोर' और ओमान के साथ बिछाई जा रही 'डीप-सी पाइपलाइन' के अलावा अब इसमें सऊदी अरब और तुर्किए का नया रेल नेटवर्क भी जुड़ गया है। खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक फैले इन तीन मजबूत रास्तों के जरिए भारत तक तेल पहुंचने वाला है।
होर्मुज को बायपास करेगा तुर्किए-सऊदी का रेल नेटवर्क
तेल के रास्तों पर लगातार हो रहे हमलों और मिसाइल स्ट्राइक की वजह से बड़े कार्गो जहाजों को महीनों लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है, जिससे परिवहन की लागत बेतहाशा बढ़ गई है। समंदर में जहाजों का सफर अब जोखिम भरा हो चुका है। वहीं ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज स्ट्रेट पर हालात हमेशा तनावपूर्ण बने रहते हैं और ईरान अक्सर इन रास्तों को बंद करने की धमकियां देता रहता है।
ऐसे में भारत, रूस, तुर्किए और सऊदी अरब जैसे देश चुप नहीं बैठे हैं। इन अड़चनों से पार पाने के लिए उन्होंने एक नया, सुरक्षित और जमीन आधारित रास्ता तैयार कर लिया है। हाल ही में तुर्किए और सऊदी अरब ने रियाद में एक बड़े रेलवे समझौते पर मुहर लगाई है, जो होर्मुज को सीधे बायपास कर देगा।
इस समझौते के तहत पुरानी और ऐतिहासिक 'हेजाज रेलवे' को बिल्कुल नए, हाई-टेक और आधुनिक रूप में दोबारा खड़ा किया जा रहा है। यह रेल गलियारा सऊदी अरब को जॉर्डन और सीरिया के रास्ते सीधे तुर्किए से जोड़ेगा।
ओमान और हिंद महासागर तक पहुंचेगी रेल लाइन
इस रेलवे योजना की सबसे खास बात यह है कि रेल लाइन को यहीं नहीं रोका जाएगा, बल्कि इसे आगे बढ़ाकर ओमान और हिंद महासागर तक ले जाया जाएगा। जमीन के रास्ते सामान और तेल की यह बड़ी ढुलाई होर्मुज पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर देगी।
भारत-ओमान ऑयल और गैस पाइपलाइन
तुर्किए-सऊदी अरब के इस रेल नेटवर्क के साथ-साथ भारत ने ओमान के साथ मिलकर एक 'डीप-सी ऑयल और गैस पाइपलाइन' बिछाने की योजना भी तैयार की है। पानी के सैकड़ों फीट नीचे बिछने वाली यह पाइपलाइन ओमान से कच्चा तेल और गैस सीधे खींचकर गुजरात के तट पर पहुंचाएगी।
3,000 किलोमीटर में फैला यह नेटवर्क 40,000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद ओमान सीधे भारत से जुड़ जाएगा और भारत को टैंकरों व जहाजों के जरिए होर्मुज या लाल सागर के जोखिम भरे पानी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इस सीधी पाइपलाइन व्यवस्था से देश की गाड़ियां, फैक्ट्रियां और पूरा कामकाज चौबीसों घंटे चालू रह सकेगा। तेल आयात और व्यापार पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा, क्योंकि बीच में न कोई समुद्री लुटेरा होगा और न ही कोई देश दबाव बना सकेगा। सामान और तेल सीधे जमीन और अंडरवाटर पाइपलाइन के जरिए भारत तक पहुंचेगा।
कैसे आपस में जुड़ेंगे ये तेल रूट
ये अलग-अलग रास्ते आपस में किस तरह जुड़ेंगे, इसका पूरा आधार मिडिल ईस्ट का भूगोल है।
- INSTC का जाल: इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए भारत का सामान समुद्र के रास्ते सीधे ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट तक पहुंचता है।
- इराक और जॉर्डन का कनेक्शन: ईरान से माल ट्रकों और ट्रेनों के जरिए आसानी से इराक की सीमा में दाखिल हो जाएगा। इराक के ठीक नीचे जॉर्डन और सऊदी अरब की सीमाएं हैं, इसलिए इराक से निकला सामान सीधे जॉर्डन और सऊदी अरब पहुंच जाएगा।
- रेलवे से सीधा मिलन: यहीं से तुर्किए और सऊदी अरब की 'हेजाज रेलवे' का जाल शुरू होता है। जॉर्डन या सऊदी अरब के रेलवे स्टेशन पर माल पहुंचते ही वह सीधे ट्रेन के जरिए तुर्किए और यूरोपीय बाजार तक पहुंच जाएगा।
भारत-रूस ट्रेड रूट की एंट्री
सिर्फ खाड़ी में ही नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण के बीच भी एक बड़ा गलियारा तैयार हो रहा है। 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) के जरिए भारत और रूस के बीच व्यापार को तेज रफ्तार मिल रही है। भारत अब ईरान और कैस्पियन सागर के रास्ते सीधे रूस और यूरोप तक अपना सामान पहुंचा रहा है, और स्वेज नहर तथा लाल सागर के झंझट से बचने के लिए यह सबसे बेहतर विकल्प बन चुका है।
मॉस्को का कहना है कि इन नए रास्तों पर कंटेनर ट्रैफिक में पिछले एक साल में ही 60% से ज्यादा का उछाल आया है, जो दर्शाता है कि दुनिया अब समुद्र के पुराने और खर्चीले रास्तों से ऊब चुकी है।
आर्थिक मोर्चे पर मजबूत होगा भारत
सीधे शब्दों में कहें तो समुद्री रास्ते पर आने वाली हर रुकावट भारत के लिए नई ताकत बनकर उभर रही है। हेजाज रेलवे, INSTC और ओमान-गुजरात गैस/ऑयल पाइपलाइन मिलकर भारत की अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार देने जा रहे हैं।
यूरोप से लेकर खाड़ी देशों तक बिछ रहे इस नए व्यापारिक जाल में भारत की स्थिति मजबूत होती जा रही है। ग्लोबल ट्रेड में अपनी पकड़ बढ़ाने की दिशा में भारत पूरी ताकत के साथ कदम बढ़ा चुका है।
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