राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
रणनीतिक महत्व और चीन की नाकाम कोशिशें
हिंद महासागर की असीम गहराइयों के बीच बसा मॉरीशस जमीन के आकार में भले ही भारत के किसी एक छोटे जिले जैसा दिखाई देता हो, लेकिन समंदर की दुनिया में इसकी ताकत किसी बड़े साम्राज्य से कम नहीं है। यह छोटा सा देश हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा का चौकीदार और पैनी नजर रखने वाली आंखें बनकर खड़ा है। ड्रैगन यानी चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति के तहत इस रणनीतिक स्थान को हथियाने के लिए अरबों का निवेश किया और लुभावने वादे किए, लेकिन मॉरीशस का दिल जीतने में उसे सफलता नहीं मिली। भारत अपने ऐतिहासिक संबंधों के कारण चीन की हर कुटिल चाल को समय रहते नाकाम करने में सफल रहा है।
मॉरीशस की समुद्री ताकत
मॉरीशस का कुल भौगोलिक भूभाग केवल 2,000 वर्ग किलोमीटर है। हालांकि, इसका असली प्रभाव इसके विशाल एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी EEZ में छिपा है। मॉरीशस लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर के समुद्री इलाके को नियंत्रित करता है, जो दुनिया का 20वां सबसे बड़ा समुद्री क्षेत्र है। यही कारण है कि चीन हमेशा से इस लोकेशन पर कब्जा जमाने के लिए बेताब रहा है। चीन ने यहां बुनियादी ढांचे के निर्माण और कर्ज के जाल के जरिए अपनी पैठ बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत की दशकों पुरानी दोस्ती और भरोसे ने चीन के हर कूटनीतिक दांव को खारिज कर दिया। नई दिल्ली में सत्ता का स्वरूप चाहे जो भी रहा हो, भारतीय नौसेना ने पिछले सात दशकों से इस देश के साथ विश्वास का रिश्ता कायम रखा है। इसी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 10 से 13 अगस्त तक मॉरीशस के दौरे पर रहे, जिससे बीजिंग की बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है।
सांस्कृतिक जुड़ाव और गांधी जी का प्रभाव
भारत और मॉरीशस के बीच कूटनीतिक संबंधों की नींव 1948 में पड़ी थी, जब भारत को स्वतंत्र हुए मात्र एक साल हुआ था। आज मॉरीशस की करीब 13 लाख की आबादी में से लगभग 70 फीसदी यानी 8.94 लाख से अधिक लोग भारतीय मूल के हैं। यह सांस्कृतिक संबंध 1901 में महात्मा गांधी की यात्रा से और भी प्रगाढ़ हुआ। जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से लौटते हुए मॉरीशस रुके थे, तो उन्होंने वहां की जनता को शिक्षा, राजनीतिक सजगता और भारत से जुड़ाव का मंत्र दिया था। मॉरीशस आज भी गांधी जी के प्रति गहरा सम्मान रखता है। इसी कारण उनका राष्ट्रीय दिवस 12 मार्च को मनाया जाता है, जो भारत के ऐतिहासिक दांडी मार्च की सालगिरह का दिन है।
चीन के आर्थिक प्रलोभन और भारत की जवाबी कार्रवाई
चीन ने अपनी स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के तहत मॉरीशस में भी सेंध लगाने की कोशिश की थी। चीन ने अफ्रीका का पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट मॉरीशस के साथ हस्ताक्षरित किया। चीनी कंपनियों ने वहां का इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नेशनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और कई अस्पताल बनाने का काम किया ताकि देश को कर्ज के जाल में फंसाया जा सके। हालांकि, भारत ने न केवल 680 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज देकर मॉरीशस की मदद की, बल्कि अगालेगा द्वीप पर एयर स्ट्रिप और जेट्टी का निर्माण करके अपनी मौजूदगी को इतना प्रभावी बना लिया कि चीन देखता ही रह गया। आज मॉरीशस की मदद से भारतीय नौसेना हिंद महासागर में चीनी जहाजों की हर हलचल पर चौबीसों घंटे नजर रखती है।
सागर से महासागर विजन तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में मॉरीशस से ही सागर यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास के विजन का ऐलान किया था। मार्च 2025 में मॉरीशस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने इस सोच को और विस्तार देते हुए महासागर विजन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य समूचे क्षेत्र की तरक्की और सुरक्षा के लिए एकजुट प्रयास करना है। सितंबर 2025 में मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम की भारत यात्रा के दौरान भी बुनियादी ढांचे और समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ी आर्थिक मदद की घोषणा की गई थी।
सैन्य सहयोग की हकीकत
भारत और मॉरीशस का रक्षा सहयोग केवल कागजी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देता है:
- एमसीजीएस बैराकुडा: मार्च 2015 में कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित यह युद्धपोत मॉरीशस को सौंपा गया, जो विदेशी देश के लिए बनाया गया पहला भारतीय युद्धपोत था।
- गश्ती जहाज: 2016 में विक्ट्री और 2017 में वैलियंट नामक गश्ती जहाज गोवा शिपयार्ड में तैयार कर मॉरीशस को दिए गए।
- हवाई क्षमता: भारत ने मॉरीशस को चार डोर्नियर समुद्री गश्ती विमान, चार चेतक हेलीकॉप्टर और तीन एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर प्रदान किए हैं।
प्रशिक्षण और व्यावसायिक साझेदारी
मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड के 1,000 से अधिक कर्मियों ने भारतीय नौसेना से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अक्टूबर 2025 में कैडेट जुगमा प्रिसिता मॉरीशस कोस्ट गार्ड की पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्होंने केरल के एझिमाला स्थित भारतीय नौसेना अकादमी से प्रशिक्षण पूरा किया। इसके अलावा, भारत ने मॉरीशस के पानी में 18 बार जाकर 47 बड़े समुद्री सर्वे किए हैं। दोनों देशों ने मिलकर 13 पेपर चार्ट और 15 इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशनल चार्ट विकसित किए हैं। अप्रैल 2026 में नौवें इंडियन ओशियन कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इन चार्ट्स की बिक्री से प्राप्त 45,000 डॉलर का रॉयल्टी चेक मॉरीशस सरकार को सौंपा।
भविष्य की सुरक्षा और साझा ढांचा
मॉरीशस अब केवल सहायता प्राप्त करने वाला देश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का मुख्य साझेदार है। मार्च 2025 के व्हाइट शिपिंग एग्रीमेंट के जरिए दोनों देशों की नौसेनाएं व्यापारिक जहाजों का रियल-टाइम डेटा साझा करती हैं। साथ ही, भारत के सहयोग से मॉरीशस के एबेने में नेशनल मैरीटाइम इंफॉर्मेशन शेयरिंग सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा का बड़ा केंद्र साबित होगा।
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