धनतेरस 2024: सुख-समृद्धि पाने के लिए इस विधि से करें भगवान कुबेर की पूजा धर्म एक घंटा पहले 5
धनतेरस के पावन अवसर पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। जानिए घर में सुख और संपन्नता लाने के लिए सही पूजा विधि और जरूरी नियम।

धनतेरस पर कुबेर पूजन का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। दीपावली के पर्व की शुरुआत इसी दिन से होती है। इस खास मौके पर माता लक्ष्मी के साथ ही धन के देवता भगवान कुबेर की पूजा करना बेहद शुभ फलदायी माना गया है। इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जा रहा है। यदि आप भी अपने घर में सुख, शांति और समृद्धि चाहते हैं, तो विधि-विधान के साथ भगवान कुबेर की आराधना जरूर करें। आइए जानते हैं पूजा की पूरी प्रक्रिया।

पूजा स्थल की तैयारी

धनतेरस के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। पूजा करने के लिए घर की उत्तर दिशा को सबसे उपयुक्त माना जाता है। उत्तर दिशा में एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। यदि आपके पास प्रतिमा उपलब्ध नहीं है, तो आप कुबेर यंत्र का भी उपयोग कर सकते हैं। विकल्प के तौर पर अपनी तिजोरी या गहनों के बक्से को ही भगवान कुबेर का प्रतीक मानकर पूजा की जा सकती है। तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं और उस पर कलावा या मौली बांधें।

पूजा की चरणबद्ध प्रक्रिया

पूजा की शुरुआत सदैव प्रथम पूज्य भगवान गणेश के आह्वान और ध्यान से करनी चाहिए। गणेश पूजन के पश्चात अपने हाथों में फूल लेकर भगवान कुबेर का स्मरण करें। इसके लिए शास्त्रों में वर्णित कुबेर ध्यान मंत्र का पाठ करें: मनुज-बाह्य-विमान-स्थितम्, गरुड-रत्न-निभं निधि-नायकम्। शिव-सखं मुकुटादि-विभूषितम्, वर-गदे दधतं भजे तुन्दिलम्॥

कुबेर देव को अर्पित करें सामग्री

भगवान कुबेर की प्रतिमा, यंत्र या तिजोरी पर जल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक ओम् श्रीं कुबेराय नमः मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें। भगवान को भोग लगाने के लिए मिठाई, फल और पंचामृत का प्रयोग करें। इस दिन मां लक्ष्मी और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की भी विशेष पूजा की जाती है। पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें। इसके बाद तिजोरी में एक नया सिक्का या कुबेर यंत्र को स्थापित कर दें।

दीपक का दान और सप्त धान्य

धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करना काफी प्रभावशाली होता है। इस समय धन रखने के स्थान पर 13 दीपक जलाना एक पुरानी परंपरा है, जिससे कुबेर देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही पूजा में सात प्रकार के अनाज यानी गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर अर्पित करें। पूजन में सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाना अत्यधिक शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त धनतेरस पर पूरी श्रद्धा और नियम से भगवान कुबेर की पूजा करते हैं, उनके जीवन में कभी धन-संपत्ति का अभाव नहीं होता। वे देवताओं के कोषाध्यक्ष होने के कारण भक्तों को अपार वैभव और रत्न प्रदान करते हैं।

मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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