होर्मुज पर फिर संकट: भारत की एलपीजी और पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर गहराया खतरा राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद कर दिया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर नया दबाव बन गया है। लंबे व्यवधान की स्थिति में देश में एलपीजी आपूर्ति और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता गहरा गई है। ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम अमेरिकी हमलों के बाद उठाया गया है और ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी भी जारी की है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर घटी इस घटना ने देश की तेल और एलपीजी आपूर्ति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका भड़का हुआ है और बीते दो दिनों से लगातार ईरान पर हमले कर रहा है। इसी के जवाब में ईरान ने होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। इसी मार्ग से भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है। वैश्विक स्तर पर देखें तो दुनिया का करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी इसी रास्ते से अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है।

बंद होने पर मचेगी हलचल

होर्मुज के बंद होने का असर पूरी दुनिया देख चुकी है। जब ईरान ने पहली बार इसे बंद किया था, तब एलपीजी से लेकर तेल तक की किल्लत खड़ी हो गई थी। बाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने पर यह मार्ग फिर से खुल गया था। मगर अब अमेरिकी हमलों के चलते ईरान ने इसे दोबारा बंद कर दिया है। अगर यह लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर हर देश पर पड़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।

भारत के लिए कितनी बड़ी चिंता

भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, एलएनजी का करीब 60% हिस्सा और एलपीजी की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं। चूंकि भारत एलपीजी और तेल का आयातक देश है, इसलिए उसकी निर्भरता भी होर्मुज पर बनी हुई है।

एलपीजी आपूर्ति पर बढ़ेगा दबाव

अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले एलपीजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। देश में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और एलपीजी का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत, दोनों पर असर पड़ सकता है। वैसे भी भारत में एलपीजी आपूर्ति अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।

क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल

इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में तेजी देखी गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार मौजूद है।

उर्वरक आपूर्ति पर भी असर

होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी काफी हद तक खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक संकट बने रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार उपलब्ध हैं, जिसके चलते तत्काल संकट की आशंका कम मानी जा रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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