वर्ष 2047 तक कैसी होगी भारतीय सेना, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों से लैस 'विकसित भारत' का सैन्य खाका भारत 2 घंटे पहले 2
भारत वर्ष 2047 तक खुद को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके तहत भारतीय सेना को आधुनिक तकनीकी क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है।

आधुनिक सैन्य शक्ति का लक्ष्य

भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित होने का है। इस बड़े सपने को साकार करने के लिए एक ऐसी सैन्य ताकत की आवश्यकता है जो न केवल रक्षा करने में सक्षम हो, बल्कि आत्मनिर्भर भी हो। वर्तमान भू-राजनीतिक चुनौतियों, विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान से जुड़े दोहरे खतरों को देखते हुए, भारत अपनी सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह से बदलने की तैयारी कर रहा है। आने वाले वर्षों में भारतीय सेना का स्वरूप पूरी तरह से डिजिटल और तकनीकी होगा।

तकनीक से लैस होगी सेना

भविष्य की भारतीय सेना अब केवल सैनिकों और पारंपरिक हथियारों पर आधारित नहीं होगी। इसमें आधुनिक तकनीकों का एक बड़ा हिस्सा शामिल होगा। भारत निम्नलिखित क्षेत्रों में तेजी से निवेश और विकास कर रहा है:

  • AI और ड्रोन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग रणनीतिक निर्णय लेने और युद्ध के मैदान में सटीक हमले करने के लिए किया जाएगा। साथ ही, ड्रोन तकनीक को व्यापक रूप से शामिल किया जा रहा है।
  • हाइपरसोनिक मिसाइल: दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को भेदने के लिए भारत अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमताओं को लगातार विकसित कर रहा है।
  • साइबर युद्ध: डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे देखते हुए सेना अपनी साइबर क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना रही है।
  • अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा: अंतरिक्ष में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है।

थिएटर कमांड और सैन्य एकीकरण

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में सबसे बड़ा सुधार थिएटर कमांड के रूप में देखा जा रहा है। इसके माध्यम से तीनों सेनाओं यानी थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इससे युद्ध की स्थिति में संसाधनों का उपयोग अधिक कुशलता से हो सकेगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। सेना का लक्ष्य एक ऐसा एकीकृत ढांचा बनाना है जो किसी भी लंबी लड़ाई में बिना विदेशी मदद के खुद को सक्षम बनाए रखे।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर

विकसित भारत के विजन का मुख्य स्तंभ 'आत्मनिर्भरता' है। रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी सप्लाई पर निर्भरता को कम करना ही मुख्य प्राथमिकता है। भारत सरकार रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देकर न केवल देश के भीतर हथियारों का निर्माण कर रही है, बल्कि भविष्य में निर्यात के लिए भी बड़े स्तर पर तैयारी कर रही है। 2047 तक भारतीय सेना अपनी स्वदेशी तकनीक की बदौलत दुनिया की सबसे मजबूत ताकतों में से एक होगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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