राष्ट्रीय राजनीति
4 घंटे पहले
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ट्रेन के सफर से जुड़ा खास अनुभव
भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने हाल ही में चंडीगढ़ की अपनी आधिकारिक यात्रा के लिए एक बहुत ही अलग और यादगार रास्ता चुना। उन्होंने वीआईपी उड़ानों या लग्जरी कारों में जाने के बजाय भारतीय रेल की पटरियों का रुख किया। अपने इस सफर के दौरान उन्होंने भारतीय रेल की यात्रा का भरपूर आनंद लिया और इसके अनुभव को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। फिलिप ग्रीन ने इस अनोखी यात्रा के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत की असली तस्वीर देखने और उसकी विविधता को महसूस करने के लिए भारतीय ट्रेनों से बेहतर और कुछ भी नहीं हो सकता है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का मंत्र
उच्चायुक्त ने अपनी इस यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उनके देश के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज अक्सर एक बात दोहराते हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि यदि किसी को भारत को सही मायनों में समझना है और उसकी नब्ज को पहचानना है, तो उसे यहां की ट्रेनों में सफर जरूर करना चाहिए। इसी सोच से प्रेरित होकर फिलिप ग्रीन ने चंडीगढ़ पहुंचने के लिए ट्रेन को चुना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुभव न केवल उनके लिए सुखद था, बल्कि यह उनके प्रधानमंत्री के उस मंत्र को भी पुख्ता करता है जो भारत को करीब से जानने के बारे में है।
पंजाब और हरियाणा में अवसरों की तलाश
चंडीगढ़ पहुंचने के बाद फिलिप ग्रीन ने अपने भविष्य के इरादे भी स्पष्ट किए। उन्होंने कहा कि वह पंजाब और हरियाणा में उन तमाम अवसरों को तलाशने के लिए पूरी तरह उत्साहित हैं, जिनसे ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच के आपसी रिश्तों को और अधिक मजबूती दी जा सके। उच्चायुक्त का मानना है कि इन क्षेत्रों में व्यापार और सहयोग की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। उनकी यह यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की एक पहल है।
शिक्षा और व्यापार पर विशेष जोर
यह पहली बार नहीं है जब फिलिप ग्रीन ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी हो। इससे पहले भी वह कई कार्यक्रमों में रक्षा, व्यापार और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की वकालत कर चुके हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच शिक्षा का क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिलिप ग्रीन का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया भारत की विकास यात्रा के अगले चरण को गति देने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि यह उचित लागत पर उपलब्ध भी है।
भविष्य के लिए कौशल विकास
अपनी चर्चा के दौरान उच्चायुक्त ने भारत के युवाओं के कौशल विकास पर भी काफी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को रोजगारपरक कौशल वाले बड़ी संख्या में लोगों की आवश्यकता होगी। ऑस्ट्रेलिया की मजबूत शिक्षा व्यवस्था भारतीय छात्रों के लिए न केवल ज्ञान का जरिया है, बल्कि यह उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने में भी सक्षम है। इस प्रकार की साझेदारी दोनों देशों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच के द्विपक्षीय रिश्ते आने वाले दशकों में और भी अधिक प्रगाढ़ और ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे।
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