नए स्टील के बर्तनों पर लगे स्टिकर हटाने के आसान तरीके, मिनटों में बिना मेहनत होंगे साफ जीवनशैली एक महीने पहले 18
नए स्टील के बर्तनों पर चिपके प्लास्टिक स्टिकर और उनकी जिद्दी गोंद हटाना अब मुश्किल नहीं। शेफ संजीव कपूर के बताए कुछ आसान घरेलू नुस्खों से यह काम चंद मिनटों में हो सकता है।

बाज़ार से नए स्टील के बर्तन घर लाने के बाद उन पर लगे प्लास्टिक के स्टिकर हटाना अक्सर सिरदर्द बन जाता है। कई बार ये स्टिकर आसानी से उतरते ही नहीं, और अगर किसी तरह निकल भी जाएं तो उनकी जगह कई दिनों, यहाँ तक कि महीनों तक चिपचिपी बनी रहती है। यह न सिर्फ़ देखने में भद्दा लगता है, बल्कि ऐसी थाली या प्लेट में खाना परोसना भी अच्छा नहीं लगता। अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो जाने-माने शेफ संजीव कपूर के बताए कुछ आसान तरीके आपके बहुत काम आ सकते हैं। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर बताया है कि इन स्टिकरों को बिना झंझट के कैसे हटाया जा सकता है।

स्टील के बर्तनों से प्लास्टिक स्टिकर हटाने के तरीके

  • हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करें: अगर स्टिकर बर्तन के बाहरी हिस्से पर लगा है, तो उसे उतारने के लिए हेयर ड्रायर बेहद कारगर है। ड्रायर को चालू करके स्टिकर वाली जगह पर करीब एक मिनट तक गरम हवा दें। गर्मी से स्टिकर की गोंद पिघल जाती है और वह बड़ी आसानी से उतर जाता है।

  • गैस की आंच पर गरम करें: अगर स्टिकर किसी गहरे बर्तन के अंदर की तरफ़ चिपका है, तो उसे खुरचने के लिए चाकू, चम्मच या करछी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। बस उस बर्तन को एक से दो मिनट के लिए गैस की आंच पर रख दें। जैसे ही गोंद पिघलने लगे, चाकू की मदद से स्टिकर को धीरे-धीरे खींच लें। इससे प्लास्टिक का स्टिकर आसानी से निकल जाएगा।

गोंद न उतरे तो क्या करें?

कई बार ऐसा होता है कि स्टिकर तो आसानी से उतर जाता है, लेकिन उसकी गोंद बर्तन पर ही चिपकी रह जाती है। ऐसी हालत में गोंद वाले हिस्से पर थोड़ा सा नारियल का तेल लगाएं। अगर नारियल का तेल न हो, तो आप कोई दूसरा तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अब इसे 5-10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ताकि गोंद तेल को अच्छी तरह सोख ले। इसके बाद किसी सूखे सूती कपड़े या पेपर टॉवल से रगड़कर साफ़ करें। इससे गोंद आसानी से निकल जाएगी, और अंत में बर्तन को डिशवॉश साबुन से धो लें।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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