धान की सीधी बुवाई: बंपर पैदावार के लिए अपनाएं यह खास तरीका, कृषि विशेषज्ञों ने दी सलाह उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 84
धान की सीधी बुवाई तकनीक खेती की लागत घटाने के साथ ही पानी बचाने में मददगार है। जानिए कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बुवाई के दौरान किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

सीधी बुवाई से खेती में बदलाव

आज के दौर में धान की सीधी बुवाई यानी DSR तकनीक किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मेहनत और पानी की खपत में भारी कमी आती है, जिससे किसान कम लागत में भी बेहतर पैदावार हासिल कर पाते हैं। खेती के जानकारों के अनुसार, यदि वैज्ञानिक तरीके से बीजों का सही प्रबंधन किया जाए, तो मुनाफा काफी बढ़ जाता है।

बुवाई का सही तरीका और गहराई

शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एनपी गुप्ता के मुताबिक, धान की सीधी बुवाई के लिए मौसम के मिजाज को समझना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए यह अनिवार्य है कि बुवाई के समय खेत में नमी का स्तर पर्याप्त बना रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि बीजों को जमीन में लगभग 5 सेंटीमीटर की गहराई पर लगाना चाहिए।

दूरी का विशेष ध्यान रखें

फसल की अच्छी बढ़वार के लिए कतारों के बीच की दूरी तय करना बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी 18 से 22 सेंटीमीटर के बीच होनी चाहिए। यद्यपि मशीनों से बुवाई करते समय बीज की दर पहले से ही निर्धारित रहती है, जिससे पौधों के बीच की सटीक दूरी बनाए रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, फिर भी बेहतर फसल प्राप्त करने के लिए इन मानकों का पालन करना बेहद आवश्यक है। सही तरीके से किया गया प्रबंधन न केवल उत्पादन को बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता को भी बनाए रखने में सहायक होता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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