गर्मी में बालों की देखभाल: हफ्ते में कितनी बार शैंपू करना है सही? जीवनशैली एक महीने पहले 66
गर्मियों में पसीने और चिपचिपाहट के कारण लोग अक्सर रोजाना बाल धोते हैं, लेकिन क्या यह सही है? जानिए आपकी स्कैल्प के प्रकार के अनुसार बालों को धोने का सही तरीका।

गर्मियों में बालों को लेकर असमंजस

गर्मी का मौसम आते ही पसीने, धूल और गंदगी की वजह से बाल तेजी से चिपचिपे होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग रोजाना शैंपू का इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन यह बालों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। बार-बार केमिकल का इस्तेमाल करने से बाल बेजान होकर झड़ने लगते हैं। बालों की सेहत बनाए रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी स्कैल्प के हिसाब से शैंपू करने की सही आवृत्ति क्या होनी चाहिए।

स्कैल्प के प्रकार और शैंपू का चुनाव

  • ऑयली स्कैल्प: अगर आपके बाल धोने के अगले ही दिन चिपचिपे होने लगते हैं, तो आप हफ्ते में 3 से 4 बार शैंपू कर सकते हैं। हालांकि, हर बार शैंपू का प्रयोग न करें। अगर पसीना ज्यादा आता है, तो केवल सादे पानी से बाल धोना बेहतर विकल्प है, क्योंकि अधिक केमिकल आपके बालों का प्राकृतिक तेल छीन लेते हैं।
  • नॉर्मल स्कैल्प: यदि आपकी स्कैल्प न तो बहुत अधिक तैलीय है और न ही बहुत सूखी, तो हफ्ते में 2 से 3 बार शैंपू करना पर्याप्त है। इससे बालों की स्वच्छता और चमक बरकरार रहती है।
  • ड्राई स्कैल्प: सूखे या घुंघराले बालों में गर्मियों के दौरान भी अधिक तेल नहीं आता। ऐसे में हफ्ते में सिर्फ 1 से 2 बार शैंपू करना ही काफी है। अधिक बार धोने से बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में कंडीशनर का उपयोग करना न भूलें।

बालों को धोते समय रखें इन बातों का ख्याल

गर्मियों में बालों की सही देखभाल के लिए केवल फ्रीक्वेंसी ही नहीं, बल्कि धोने का तरीका भी मायने रखता है। सबसे पहले तो बालों को धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि यह स्कैल्प को सुखा देता है। हमेशा ठंडे या सामान्य तापमान वाले पानी का ही उपयोग करें। इसके अलावा, रोजाना या अधिक बार धोने की स्थिति में सल्फेट-फ्री या माइल्ड शैंपू का चुनाव करें। आप चाहें तो हर्बल शैंपू का उपयोग भी कर सकते हैं, जो बालों को नुकसान पहुंचाए बिना गंदगी साफ करने में सहायक होते हैं।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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