मानसून में लगाएं टमाटर की ये उन्नत किस्में, कम लागत में होगी बंपर कमाई और बाजार में मिलेगा दोगुना दाम बिहार एक घंटा पहले 3
जमुई के प्रगतिशील किसान निरंजन कुमार के मुताबिक जून-जुलाई में टमाटर की अगेती खेती के लिए नर्सरी तैयार करना सबसे उपयुक्त रहता है, क्योंकि मानसून के टमाटर को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

बिहार में मानसून की दस्तक होने ही वाली है और इस मौसम के साथ ही किसान सब्जियों की खेती में जुट जाते हैं। यदि रबी फसल की कटाई के बाद आपके खेत खाली पड़े हैं, तो इस समय टमाटर की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। जमुई के प्रगतिशील किसान निरंजन कुमार का मानना है कि टमाटर की अगेती खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का बेहतरीन जरिया साबित हो सकती है।

निरंजन कुमार बताते हैं कि टमाटर की खेती के इच्छुक किसानों के लिए जून-जुलाई का महीना नर्सरी तैयार करने की दृष्टि से सबसे उपयुक्त रहता है। उनका कहना है कि मानसून के दौरान उगाए गए टमाटर की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। उन्होंने बताया कि वैसे तो बाजार में टमाटर की ऐसी कई किस्में मौजूद हैं जो साल भर उपज देती हैं, लेकिन कम मेहनत में बेहतर पैदावार पाने के लिए कुछ खास किस्मों का चयन फायदेमंद रहता है। इस मौसम में सिंचाई की ज्यादा झंझट भी नहीं रहती, जिससे किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं।

इन किस्मों की करें खेती

किसान निरंजन कुमार के अनुसार जून-जुलाई के महीने में टमाटर की खेती करने वाले किसान स्वर्ण वैभव, स्वर्ण नवीन, पूसा हाइब्रिड-2 और अर्का रक्षक जैसी उन्नत किस्मों को अपने खेतों में लगा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इन किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है और बारिश के मौसम में भी इनकी उपज अपेक्षाकृत बेहतर रहती है।

उन्होंने जानकारी दी कि अगर किसान जून महीने में नर्सरी तैयार कर लें तो 20 से 25 दिनों बाद टमाटर के पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। बारिश के दौरान बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर की मांग हमेशा बनी रहती है, यही वजह है कि कई बार मानसून में पैदा हुआ टमाटर किसानों को दोगुना तक लाभ दिला देता है।

मानसून में इन बातों का रखें ध्यान

निरंजन कुमार का कहना है कि नर्सरी तैयार करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि इस मौसम में नर्सरी का बेड जमीन से थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए, ताकि बारिश का पानी जमा न हो और पौधों की जड़ें सड़ने से बची रहें। बीज बोने के बाद नियमित निगरानी और रोग प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया कि जब पौधे पर्याप्त मजबूत हो जाएं, तो उन्हें मुख्य खेत में उचित दूरी पर रोपित करना चाहिए। ऐसा करने से पौधों का विकास बेहतर होता है और फफूंदजनित रोगों का खतरा भी कम रहता है। उनका कहना है कि रबी के बाद खाली पड़े खेतों में टमाटर की अगेती खेती कर किसान आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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