राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के नियमों में बदलाव, गृह मंत्रालय ने जारी की गाइडलाइंस राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 74
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सही उच्चारण और गायन के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसका पालन करना अनिवार्य होगा।

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की गरिमा को लेकर कड़े निर्देश

अगर आप सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत गाने की तैयारी कर रहे हैं, तो अब आपको शब्दों और उच्चारण को लेकर बेहद सतर्क रहना होगा। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के लिए एक नई नियमावली जारी की है। मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इन राष्ट्रीय प्रतीकों को गाते या बजाते समय शब्दों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या गलत उच्चारण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी सरकारी कार्यालयों और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा गया है।

उच्चारण की शुद्धता और सही लिपि पर जोर

गृह मंत्रालय के ताजा आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन करते समय उनकी मूल लिपि और सही पाठ का ध्यान रखा जाए। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शब्दों का उच्चारण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनी रहे। इस संदर्भ में मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक विस्तृत गाइडलाइन भी अपलोड की है, जहाँ से सही पाठ और उच्चारण की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि देश भर में एकरूपता बनी रहे और कहीं भी इन प्रतीकों के अपमान की स्थिति उत्पन्न न हो।

किन अवसरों पर अनिवार्य है गायन

मंत्रालय ने अपने 9 जुलाई के आदेश में उन कार्यक्रमों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जहाँ राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य है। इन अवसरों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • नागरिक सम्मान से जुड़े सभी प्रकार के समारोह।
  • औपचारिक राजकीय कार्यक्रम और सरकार द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण आयोजन।
  • राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान के दौरान।
  • राष्ट्रपति द्वारा ऑल इंडिया रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करने से ठीक पहले और संबोधन के तुरंत बाद।
  • राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के औपचारिक राजकीय कार्यक्रमों में आगमन और प्रस्थान के समय।
  • परेड के दौरान जब राष्ट्रीय ध्वज को लाया जाता है, तब भी इसे बजाना आवश्यक है।

राज्य गीत और राष्ट्रगीत का समन्वय

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी राज्य में राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के साथ-साथ राज्य गीत को भी शामिल किया जाता है, तो वहां प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखना होगा। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी स्थितियों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों को ही गाया या बजाया जाएगा। इसके साथ ही, एक निश्चित क्रम का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले राष्ट्रगीत का गायन होगा और उसके तुरंत बाद राष्ट्रगान बजाया जाएगा। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि इन राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रदर्शन में किसी भी प्रकार की तकनीकी या व्यवहारिक त्रुटि न हो। यह निर्देश न केवल सरकारी विभागों के लिए हैं, बल्कि यह सभी के लिए एक संदेश है कि राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता बरतना हर नागरिक का कर्तव्य है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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