आरएसएस रजिस्टर्ड क्यों नहीं? मोहन भागवत का जवाब- 'हिन्दू धर्म भी तो पंजीकृत नहीं है' राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे की संघ से रजिस्ट्रेशन के कागज दिखाने की मांग पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दो टूक कहा कि पंजीकरण उन्हें कराना पड़ता है जिन्हें सरकार से कुछ लेना होता है, और संघ ऐसा कुछ नहीं लेता।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण को लेकर उठे सवाल पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट और बेबाक जवाब दिया है। कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने मांग की थी कि संघ को यह कागज दिखाना होगा कि वह रजिस्टर्ड है या नहीं। इसी मांग को लेकर खरगे ने संघ प्रमुख को बाकायदा पत्र लिखकर दस्तावेज मांगे थे।

भागवत ने सीधे ठुकराई मांग

जब इस पत्र को लेकर मोहन भागवत से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह इस पत्र का कोई जवाब नहीं देंगे। उन्होंने कहा, "कई चीजें रजिस्टर्ड नहीं हैं। यहां तक कि हिन्दू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है। जिन्हें सरकार से फंड चाहिए होता है, वे रजिस्टर होते हैं। हम सरकार से कुछ नहीं लेते, इसलिए हमें रजिस्टर्ड होने की कोई जरूरत नहीं।"

केरल के त्रिशूर में पूछा गया सवाल

केरल के त्रिशूर में मोहन भागवत से पूछा गया था कि आरएसएस रजिस्टर्ड क्यों नहीं है और इससे लोगों के मन में शक पैदा होता है, साथ ही प्रियांक खरगे के पत्र पर वह क्या कहेंगे। इसके जवाब में भागवत ने कहा कि यह सब राजनीति है।

उन्होंने कहा, "ये सारे हथकंडे उन लोगों को लुभाने के लिए अपनाए जा रहे हैं जो इसके आदी हो चुके हैं। हमें इन सब चीजों का सामना करना पड़ा है और अब हम इसके आदी हो चुके हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो हमें लगता कि कुछ गड़बड़ है।" भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ खुलेआम काम करता है, गुप्त रूप से नहीं।

'हमारा संविधान सरकार के पास है'

संघ प्रमुख ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि संघ की शुरुआत ब्रिटिश काल में जनता की इच्छा से हुई थी। उन्होंने बताया कि सरकार ने संघ पर दो बार प्रतिबंध लगाया और दोनों बार वह प्रतिबंध हटा भी लिया गया- एक बार अदालत के आदेश से और दूसरी बार सत्याग्रह के जरिए।

भागवत ने कहा, "सरकार को इसके बारे में पता है। उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया, इसका मतलब है कि उन्हें पता था कि आरएसएस कहीं तो मौजूद है। 100 से अधिक वर्षों में किसी ने हमें यह नहीं बताया कि पंजीकरण कराना आवश्यक है। हमारा लिखित संविधान सरकार के पास है, जिसे हमने 1950 के दशक में प्रस्तुत किया था।"

प्रियांक खरगे ने भेजा था पत्र

प्रियांक खरगे ने 13 जून को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने संघ के रजिस्टर्ड और पारदर्शी होने की मांग करते हुए कहा था कि संघ को यह कागज दिखाना पड़ेगा कि वह रजिस्टर्ड है या नहीं। इस पत्र में खरगे ने संघ से कुल 8 सवाल पूछे थे और फंडिंग का स्रोत बताने को भी कहा था।

आरएसएस प्रमुख ने साफ कर दिया है कि वह कोई जवाब नहीं देंगे, क्योंकि इसकी कोई जरूरत नहीं है और यह मांग पूरी तरह राजनीतिक है। उन्होंने दोहराया कि संघ ब्रिटिश के जमाने में बना था।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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