सर्दियों में क्यों बढ़ती है आंखों में जलन और सूखेपन की समस्या? जोधपुर के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद चौहान से जानें बचाव के सटीक उपाय जीवनशैली एक घंटा पहले 4
सर्दियों में वातावरण की नमी घटने से आंखों में रूखापन और जलन की शिकायत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने ठंडी हवाओं, बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम से बचाव और बिना डॉक्टरी परामर्श के दवा न लेने की चेतावनी दी है।

सर्दियों के सुहावने मौसम के साथ ही सेहत से जुड़ी कई तरह की चुनौतियां भी सामने आने लगती हैं। इस मौसम में तापमान में गिरावट और हवा में नमी का स्तर कम होने के कारण आंखों में जलन, भारीपन और सूखापन यानी ड्राई आई की समस्या बहुत तेजी से बढ़ती है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समय विशेष सावधानी बरतने का होता है। जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौहान ने सर्दियों में आंखों की सेहत पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों और उनसे बचाव के तरीकों पर विस्तार से जानकारी साझा की है।

सर्दियों में हवा की कम नमी बनती है ड्राई आई की मुख्य वजह

डॉ. अरविंद चौहान के अनुसार, सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वातावरण की नमी में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। सूखी और ठंडी हवाएं हमारी आंखों की सतह से प्राकृतिक नमी को तेजी से सोख लेती हैं। इस वजह से आंखों में रूखापन आने लगता है और मरीजों में जलन, चुभन तथा लालिमा की शिकायत बढ़ जाती है। सर्दियों के दिनों में अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में ड्राई आई से पीड़ित मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखा जाता है। इसके अलावा, उम्रदराज लोगों और छोटे बच्चों पर मौसम के इस बदलाव का प्रभाव अधिक गहरा पड़ता है, इसलिए उनकी आंखों की देखभाल में विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।

मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए सर्दियों का मौसम क्यों माना जाता है बेहतर?

अक्सर यह देखा गया है कि लोग सर्दियों के महीनों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक मानते हैं। डॉ. अरविंद चौहान का कहना है कि आम जनता के बीच यह धारणा काफी प्रचलित है कि सर्दियों में सर्जरी कराने से आंखों में संक्रमण का खतरा कम रहता है और रिकवरी तेजी से होती है। यही वजह है कि सर्दियों के दौरान अस्पतालों में मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा कराने वाले मरीजों की संख्या में अचानक काफी वृद्धि हो जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों में इस दौरान आधुनिक तकनीकों के जरिए मोतियाबिंद के उन्नत ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

डिजिटल स्क्रीन और मोबाइल का बच्चों की आंखों पर बढ़ता खतरा

आजकल के आधुनिक दौर में बच्चों की दिनचर्या में बहुत बड़ा बदलाव आया है। बच्चे मैदानी खेलों और किताबों से दूर होकर घंटों मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप जैसी डिजिटल स्क्रीन के सामने समय बिता रहे हैं। डॉ. चौहान ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि स्क्रीन टाइम अत्यधिक बढ़ने, लगातार गैजेट्स के संपर्क में रहने और धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से बच्चों की कोमल आंखों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों में थकान, सूखापन और दृष्टि से जुड़ी अन्य समस्याएं कम उम्र में ही उभरने लगी हैं।

आंखों की गंभीर बीमारियों का समय पर निदान है जरूरी

नेत्र स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रूप से आंखों की जांच कराना बेहद जरूरी है। अस्पताल में कई प्रमुख और गंभीर समस्याओं का समाधान आधुनिक तकनीकों से किया जा रहा है:

  • मोतियाबिंद के उन्नत ऑपरेशन: आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों द्वारा मोतियाबिंद का इलाज आसानी से संभव है।
  • काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा): समय रहते काला मोतियाबिंद की पहचान और इलाज न होने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है, इसलिए सही समय पर जांच कराना आवश्यक है।
  • डायबिटीज के मरीजों की रेटिना जांच: मधुमेह से पीड़ित मरीजों में आंखों के पर्दे यानी रेटिना को नुकसान पहुंचने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए उन्हें अपने रेटिना की विशेष जांच नियमित रूप से करानी चाहिए।
  • बच्चों में भेंगापन (स्क्विंट): छोटे बच्चों में भेंगापन की समस्या का सटीक और समयबद्ध समाधान संभव है, बशर्ते सही समय पर विशेषज्ञ से संपर्क किया जाए।

सर्दियों में आंखों को सुरक्षित रखने के जरूरी और कारगर उपाय

आंखों की सुरक्षा और रोशनी को बेहतर बनाए रखने के लिए डॉ. अरविंद चौहान ने कुछ आसान लेकिन बेहद असरदार सुझाव दिए हैं, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना आवश्यक है:

  • पौष्टिक और संतुलित आहार लें: आंखों की सेहत सुधारने और दृष्टि को मजबूत बनाने के लिए अपनी दैनिक खुराक में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और विटामिन से भरपूर आहार को प्रमुखता से शामिल करें।
  • धूल-मिट्टी और ठंडी हवाओं से बचाव: सर्दियों में बाहर निकलते समय तेज ठंडी हवाओं और धूल-मिट्टी से अपनी आंखों का बचाव करें। बाहर जाते समय चश्मे का इस्तेमाल करना एक अच्छा विकल्प है।
  • खुद डॉक्टर बनने से बचें: किसी भी तरह की जलन या सूखापन महसूस होने पर खुद से दवा या आई ड्रॉप खरीदने की गलती न करें। बिना किसी योग्य नेत्र विशेषज्ञ (आई स्पेशलिस्ट) की सलाह के मेडिकल स्टोर से सीधी दवा खरीदकर डालना आंखों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
  • सुरक्षित और डॉक्टरी सलाह पर आधारित इलाज: हमेशा किसी प्रशिक्षित डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही आंखों में कोई भी दवा या आई ड्रॉप डालें, ताकि किसी भी बड़े नुकसान या साइड इफेक्ट से बचा जा सके।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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