करवा चौथ 2024: चांद को अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का करें जाप, पति की लंबी उम्र के लिए मांगें आशीर्वाद धर्म एक घंटा पहले 6
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय विशेष मंत्रों का उच्चारण करना बेहद फलदायी माना जाता है।

करवा चौथ का महत्व और परंपरा

करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ कठिन निर्जला व्रत का पालन करती हैं। शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, विघ्नहर्ता गणेश जी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस व्रत की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा शाम को चंद्रमा का दर्शन करना, उन्हें अर्घ्य देना और उसके बाद ही व्रत को खोलना है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा को जल अर्पित करते समय कुछ विशिष्ट मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना गया है।

देवी पार्वती की उपासना का मंत्र

करवा चौथ के पावन पर्व पर माता पार्वती की पूजा करना सौभाग्य का सूचक माना जाता है। 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस त्यौहार के दिन अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए देवी गौरी की आराधना अवश्य करनी चाहिए। पूजा के दौरान आप नीचे दिए गए मंत्र का जाप कर सकती हैं:

मंत्र: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इस मंत्र का अर्थ अत्यंत गहरा है। इसका भाव यह है कि हे मां गौरी, आप सभी प्रकार के मंगल कार्यों का आधार हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं। मैं आपको बारंबार नमन करती हूं। आप अपनी शरण में आने वाले प्रत्येक भक्त की रक्षा करें और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें। मान्यता है कि शाम को पूजा के दौरान इस मंत्र का 11 बार जाप करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

चंद्र देव को अर्घ्य देने के मंत्र

जब चंद्रमा का उदय होता है, तो उन्हें अर्घ्य देना इस व्रत का अंतिम और मुख्य चरण होता है। चंद्र देव को अर्घ्य देते समय निम्नलिखित मंत्रों का स्मरण करना चाहिए:

  • ॐ सोम सोमाय नमः।
  • ॐ चंद्राय नमः।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल अर्पित करते समय इन मंत्रों का कम से कम 11 बार उच्चारण करना चाहिए। अर्घ्य देने के पश्चात दोनों हाथों को जोड़कर चंद्र देव से अपने पति की लंबी उम्र, उनके अच्छे स्वास्थ्य और पूरे परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

साधना के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय मन में पूरी श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखना अनिवार्य है। हालांकि पूजा की विधियां अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, लेकिन आस्था का मूल भाव एक ही है। चंद्र देव और मां पार्वती की पूजा करके महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख और शांति का संचार करने की कामना करती हैं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप