यूरिक एसिड की समस्या है तो सतर्क हो जाएं, जानें आपके लिए कौन सी दाल है फायदेमंद और किससे करना है परहेज जीवनशैली एक महीने पहले 61
बढ़ते हुए यूरिक एसिड लेवल को नियंत्रित करने के लिए सही आहार का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। जानें कि किन दालों का सेवन करना सुरक्षित है और किन से आपको दूरी बनाने की जरूरत है।

यूरिक एसिड और खान-पान का गहरा संबंध

आज के दौर में बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या बहुत आम हो गई है। जब शरीर में प्यूरीन का मेटाबॉलिज्म सही तरीके से नहीं हो पाता, तो यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन, पैरों के अंगूठे में जकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में अपने आहार पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। अक्सर लोग सोचते हैं कि दालें स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन यूरिक एसिड की स्थिति में हर दाल का सेवन करना सही नहीं माना जाता है।

कौन सी दालें सुरक्षित मानी जाती हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यूरिक एसिड के मरीजों को ऐसी दालों का चुनाव करना चाहिए जिनमें प्यूरीन की मात्रा कम हो।

  • मूंग दाल: इसे सभी दालों में सबसे हल्का और सुपाच्य माना जाता है। इसमें प्यूरीन की मात्रा अन्य दालों की तुलना में काफी कम होती है। यदि आप यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे हैं, तो सीमित मात्रा में मूंग दाल का सेवन करना एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
  • मसूर दाल: मसूर की दाल आयरन और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है। हालांकि, इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि आपका यूरिक एसिड लेवल कितना है। यदि स्तर नियंत्रण में है, तो आप चिकित्सक या किसी पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह लेकर इसे संतुलित मात्रा में खा सकते हैं।
  • धुली उड़द या मिक्स दाल: कभी-कभार स्वाद बदलने के लिए मिक्स दाल का सेवन किया जा सकता है, लेकिन इसकी मात्रा पर कड़ा नियंत्रण रखना अनिवार्य है। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर में प्यूरीन का बोझ बढ़ सकता है।

इन दालों और फलियों से रहें सावधान

अगर आपका यूरिक एसिड लेवल काफी अधिक है या आपको बार-बार गाउट अटैक की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो आपको कुछ खास प्रकार की फलियों और दालों से परहेज करने की सख्त जरूरत है। इस श्रेणी में मुख्य रूप से चना दाल, काबुली चना, राजमा, लोबिया और साबुत उड़द दाल आती हैं। इन खाद्य पदार्थों में प्रोटीन के साथ-साथ प्यूरीन की अधिक मात्रा होती है, जो शरीर में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को तेजी से बढ़ा सकते हैं, जिससे जोड़ों का दर्द और बिगड़ सकता है।

क्या दालें पूरी तरह बंद कर देना सही है?

यह एक बड़ा सवाल है कि क्या यूरिक एसिड बढ़ने पर दालों का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। इसका जवाब है नहीं। दालें शरीर के लिए आवश्यक फाइबर, प्रोटीन और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत हैं। ज्यादातर लोगों को दालें पूरी तरह से छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती है। महत्वपूर्ण यह है कि आप किस प्रकार की दाल चुन रहे हैं और उसे किस मात्रा में खा रहे हैं। यूरिक एसिड या गाउट से पीड़ित व्यक्ति के लिए यह सबसे बेहतर होता है कि वे अपने स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार किसी विशेषज्ञ डायटीशियन से अपना चार्ट बनवाएं।

जीवनशैली में सुधार ही एकमात्र समाधान

यूरिक एसिड के स्तर को कम करने के लिए केवल दालों पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। संतुलित आहार के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है, ताकि शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। इसके अलावा, रोजाना शारीरिक गतिविधि और तनावमुक्त जीवनशैली भी यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। याद रखें कि मूंग जैसी हल्की दालों का सीमित सेवन और छोले या राजमा जैसी भारी फलियों से बचाव करना ही आपको इस समस्या से राहत दिलाने में मददगार साबित होगा। अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और आहार में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दें।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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