दांतों की गंभीर समस्याओं के लिए रामबाण है यह खास दातून, मात्र 100 रुपये किलो में मिल रही सुविधा जीवनशैली 2 महीने पहले 62
मुजफ्फरपुर के एक निवासी ने बज्रदंती के औषधीय गुणों के जरिए दांतों की बीमारियों का देसी इलाज पेश किया है, जो अब काफी चर्चा में है।

दांतों की समस्या से राहत का देसी तरीका

आज के दौर में दांतों और मसूड़ों की समस्याओं से हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। तमाम तरह के महंगे टूथपेस्ट और डॉक्टर के चक्कर लगाने के बाद भी कई लोगों को स्थाई आराम नहीं मिलता। ऐसे में मुजफ्फरपुर के गोविंदपुर से एक राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ रहने वाले श्रीकांत कुशवाहा ने एक ऐसे औषधीय पौधे की खोज की है जो दंत रोगों के लिए बेहद कारगर साबित हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में इसे कठ सरइया के नाम से जाना जाता है, जबकि आयुर्वेद की भाषा में इसे बज्रदंती कहा जाता है।

पौधे का संरक्षण और खेती

श्रीकांत कुशवाहा पिछले कई सालों से औषधीय पौधों को सहेजने का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने बागान में 400 से अधिक अलग-अलग प्रकार के दुर्लभ पौधों का संरक्षण किया है। श्रीकांत के अनुसार, वे बज्रदंती के पौधे को बिहटा के जंगलों से लेकर आए थे और अब वे अपने निजी बगीचे में इसकी खेती कर रहे हैं। वे इस पौधे के डंठल को सुखाकर उसका बारीक पाउडर तैयार करते हैं। उनका दावा है कि इस पाउडर का नियमित उपयोग दांतों की सफाई और मसूड़ों की मजबूती के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

दावा: एक महीने में असर

श्रीकांत बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले इस पाउडर का इस्तेमाल अपने घर के सदस्यों पर किया था। जब उन्हें इसके सकारात्मक परिणाम मिले, तब उन्होंने इसे ग्रामीणों के बीच भी साझा करना शुरू किया। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस दातून या पाउडर का इस्तेमाल करता है, तो मात्र एक महीने के भीतर दांतों से जुड़ी कई आम समस्याएं दूर हो सकती हैं। वर्तमान में वे इस प्राकृतिक पाउडर को 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि आम लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

नियमित उपयोग है जरूरी

इस औषधीय उपाय की सफलता का मुख्य राज इसके नियमित इस्तेमाल में छिपा है। श्रीकांत का कहना है कि लोग इसका उपयोग बीच-बीच में छोड़ने के बजाय निरंतरता बनाए रखें, तभी इसका पूरा असर देखने को मिलता है। चूंकि यह पूरी तरह प्राकृतिक है, इसलिए इसके दुष्प्रभाव की संभावना भी बहुत कम रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी परंपराओं के अनुसार दातून के रूप में ऐसे औषधीय पौधों का उपयोग सदियों से होता आया है, जिसे श्रीकांत ने फिर से लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है।

विशेषज्ञों की सलाह भी जरूरी

भले ही बज्रदंती को आयुर्वेद में दांतों के स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना गया हो, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता भी आवश्यक है। यदि किसी को दांतों में गंभीर दर्द, मसूड़ों से खून आना, सूजन या कोई बड़ा संक्रमण हो, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में दंत चिकित्सक से परामर्श करना सबसे उचित रहता है। इन पारंपरिक उपायों को मुख्य उपचार के विकल्प के रूप में देखने के बजाय एक सहायक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में अपनाना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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