बदलते मौसम में बीमारियों से बचाव: सुबह-शाम की ठंडक और दिन की गर्मी में ऐसे रखें अपनी सेहत का ध्यान जीवनशैली एक घंटा पहले 3
अक्टूबर के आखिरी दिनों में तापमान के उतार-चढ़ाव से सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार से जानिए इस मौसम में स्वस्थ रहने के खास तरीके।

अक्टूबर के अंत में बदलता मौसम और स्वास्थ्य चुनौतियां

ऋषिकेश में अक्टूबर का महीना समाप्त होने की ओर है और मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। इस समय सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंड महसूस होती है, जबकि दोपहर के समय धूप में अब भी काफी गर्मी बनी रहती है। तापमान में आने वाले इस अचानक बदलाव के कारण लोगों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे समय में खान-पान और दैनिक आदतों में की गई थोड़ी सी भी लापरवाही शरीर के लिए भारी साबित हो सकती है। अगर मौसम के मिजाज को देखते हुए दिनचर्या में सही समय पर बदलाव न किया जाए, तो विभिन्न प्रकार की बीमारियां शरीर को आसानी से घेर सकती हैं।

शरीर पर तापमान में गिरावट और उतार-चढ़ाव का असर

आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने बदलते मौसम के प्रभावों पर जानकारी साझा करते हुए बताया है कि तापमान में होने वाला यह लगातार बदलाव इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसके साथ ही इसका प्रतिकूल असर सांस की नलियों पर भी पड़ता है। जब मौसम ठंडा होने लगता है, तो आमतौर पर लोगों को प्यास कम महसूस होती है। प्यास कम लगने के चक्कर में लोग पानी पीना बहुत कम कर देते हैं, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी की समस्या पैदा हो जाती है। पानी की यह कमी शरीर की प्राकृतिक प्रणाली को कमजोर कर सकती है।

बदलते मौसम में बढ़ने वाले मुख्य रोग और समस्याएं

तापमान के इस उतार-चढ़ाव के कारण कई तरह की शारीरिक समस्याएं सामने आने लगती हैं। इनमें से प्रमुख परेशानियां इस प्रकार हैं:

  • सर्दी और जुकाम: सुबह-शाम की ठंडी हवा के संपर्क में आने से बंद नाक और बहती नाक की समस्या आम हो जाती है।
  • खांसी और गले में खराश: मौसम में बदलाव के कारण गले में संक्रमण, दर्द और खराश जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
  • वायरल बुखार: रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से लोग तेजी से वायरल फीवर की चपेट में आ जाते हैं।
  • सांस संबंधी परेशानियां: सुबह और शाम के समय चलने वाली ठंडी हवा सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकती है, जिससे अस्थमा और एलर्जिक प्रतिक्रियाओं से पीड़ित मरीजों की तकलीफ काफी बढ़ जाती है।
  • सिरदर्द और जोड़ों में दर्द: मौसम के अचानक बदलने और तापमान में उतार-चढ़ाव होने के कारण कुछ लोगों को लगातार सिरदर्द या फिर जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगती है।

बंद जगहों में वायरस फैलने का बढ़ता खतरा

ठंडक का एहसास होते ही अक्सर लोग अपने घरों के खिड़की-दरवाजे बंद कर लेते हैं और अंदर ज्यादा समय बिताने लगते हैं। बंद स्थानों पर अधिक देर तक रहने की वजह से हवा का संचार ठीक से नहीं हो पाता है। ऐसी बंद जगहों पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक वायरस फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए बदलते मौसम में कमरे के वातावरण और ताजी हवा का पूरा ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।

खान-पान और दिनचर्या में सुधार जरूरी

मौसम के हिसाब से अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए डॉ. राजकुमार ने खान-पान और आदतों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। प्यास न लगने पर भी शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी देना बेहद जरूरी है। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में लापरवाही से बचना चाहिए। सही समय पर सही आहार लेने और ठंडी हवाओं से खुद को बचाकर रखने से बदलते मौसम में बीमारियों से पूरी तरह बचा जा सकता है और शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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