आजादी के 79 साल बाद बस्तर का सपना सच, रावघाट से रायपुर तक दौड़ेगी यात्री ट्रेन छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 6
बस्तर क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि अब रावघाट से रायपुर तक यात्री ट्रेन सेवा की शुरुआत हो रही है। इस परियोजना का पहला सर्वे 1914 में हुआ था और अब जाकर इसे पूरा किया गया है।

रावघाट से रायपुर तक रेल सेवा की शुरुआत

बस्तर के रेल इतिहास में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। आजादी के 79 साल बाद, अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले रावघाट को अब राजधानी रायपुर से सीधी ट्रेन सेवा के जरिए जोड़ा जा रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करने वाले हैं। इस कार्यक्रम के दौरान ही ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन का विस्तार रावघाट तक किए जाने के लिए हरी झंडी दिखाई जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र को अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सर्विस की भी बड़ी सौगात मिल रही है।

एक सदी लंबा संघर्ष और सफर

रावघाट तक रेल पहुंचाने का सपना एक सदी से भी ज्यादा पुराना है। इस क्षेत्र में रेल लाइन बिछाने की प्रक्रिया 1914 में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान शुरू हुई थी, जब बंगाल नागपुर रेलवे ने पहली बार इसका सर्वे किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 1917-18 के दौरान कुरूद से लिकमा के बीच जंगल की उपज ढोने के लिए फॉरेस्ट ट्राम चलाने का भी उल्लेख मिलता है। देश की आजादी मिलने के बाद 1974 में इस परियोजना का तकनीकी और आर्थिक सर्वे फिर से शुरू हुआ। लंबी जद्दोजहद के बाद साल 1998-99 के रेल बजट में इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिली। आगे चलकर 2005 से 2007 के बीच रेलवे, सेल और छत्तीसगढ़ सरकार ने एक समझौता किया, जिसके बाद साल 2008 में रेल विकास निगम लिमिटेड को इसके निर्माण का जिम्मा सौंपा गया।

नक्सली चुनौतियों के बीच बिछी पटरियां

दल्लीराजहरा से रावघाट तक करीब 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पूरा इलाका नक्सल प्रभावित होने के कारण निर्माण कार्य में पग-पग पर बाधाएं आईं। इस परियोजना के निर्माण के दौरान हुई हिंसा में तीन सुरक्षाकर्मियों और चार मजदूरों ने अपनी जान गंवाई। परियोजना के दौरान काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर पांच किलोमीटर की दूरी पर विशेष सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए थे। सुरक्षा के खतरों के कारण निर्माण कार्य की गति धीमी रही और प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे ही काम हो पाता था।

बस्तर के लिए भविष्य की योजनाएं

इस रेल मार्ग के शुरू होने से न केवल आम लोगों के लिए रायपुर आना-जाना सुगम होगा, बल्कि बस्तर के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। इसके अलावा रेलवे की भविष्य की योजनाओं में धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण भी शामिल है। इस प्रस्तावित लाइन को कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई होते हुए जगदलपुर तक ले जाया जाएगा, जिससे बस्तर को रायपुर तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त कोतावालसा-किरंदुल रेल मार्ग के दोहरीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है, जिससे भविष्य में लौह अयस्क और अन्य माल की ढुलाई में काफी बढ़ोतरी होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप