National Doctors' Day 2026: डॉ. बिधान चंद्र रॉय के जीवन की अनकही गाथा और उनका योगदान जीवनशैली 2 महीने पहले 106
हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो महान चिकित्सक और दूरदर्शी नेता डॉ. बिधान चंद्र रॉय को श्रद्धांजलि है। आइए जानते हैं उनके संघर्षों और आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका के बारे में।

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस और डॉ. बीसी रॉय का महत्व

भारत में प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन न केवल चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह महान व्यक्तित्व डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि भी है। उनका मानना था कि एक स्वतंत्र राष्ट्र तभी सफल हो सकता है जब उसके नागरिक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हों। उन्हें आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का जनक माना जाता है, जिन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा का कड़ा संघर्ष

डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को पटना में हुआ था। उनकी शिक्षा की नींव पटना कॉलेज में पड़ी, जहाँ उन्होंने गणित में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनकी सफलता का सफर आसान नहीं था, बल्कि वह संघर्षों से भरा था। उच्च शिक्षा के लिए जब वे लंदन के सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल गए, तो वहां के डीन ने उन्हें प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। उन्हें एशियाई मूल का होने और विद्रोही बंगाल का निवासी होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा।

हालांकि, डॉ. रॉय हार मानने वालों में से नहीं थे। उन्होंने उस संस्थान में पूरे 30 बार आवेदन किया। उनके निरंतर प्रयास और धैर्य के आगे डीन को झुकना पड़ा और उन्हें दाखिला मिल गया। उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए मात्र सवा दो साल के भीतर ही MRCP और FRCS जैसी विश्व की प्रतिष्ठित मेडिकल डिग्रियां हासिल कर लीं।

महात्मा गांधी के चिकित्सक और राजनीतिक सफर

1911 में भारत लौटने के बाद उन्होंने चिकित्सा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि लोग उन्हें नब्ज छूकर बीमारी का सही निदान करने वाला विशेषज्ञ मानने लगे थे। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे महात्मा गांधी के निजी चिकित्सक और करीबी मित्र थे। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के कठिन समय में जब गांधी जी का स्वास्थ्य बिगड़ा, तो डॉ. रॉय ने ही उनका उपचार किया था।

राजनीति में उनका प्रवेश महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के विशेष आग्रह पर हुआ। उन्होंने जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया और 1948 में पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दिन यानी 1962 तक इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। वे केवल एक डॉक्टर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी राजनेता भी थे, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन आज भी देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप