जीवनशैली
एक दिन पहले
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विचारों
खीस का महत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
गाय और भैंस के ब्याने के बाद निकलने वाले दूध को खीस या कोलोस्ट्रम के नाम से जाना जाता है। पोषण के नजरिए से यह दूध किसी अमृत से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें प्रोटीन, विटामिन और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने वाले कई अहम तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
बछड़े के लिए पहली खुराक
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंजना सिन्हा के अनुसार, पशुपालकों को इस दूध के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि ब्याने के बाद 30 मिनट के भीतर ही नवजात बछड़े को खीस पिलाना बेहद जरूरी है। यह बछड़े के बेहतर विकास और उसे बीमारियों से बचाने के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
इंसानों के लिए भी लाभकारी
अक्सर देखा गया है कि कुछ सामाजिक मान्यताओं के कारण किसान इस दूध का सही उपयोग नहीं कर पाते हैं और यह बर्बाद हो जाता है। हालांकि, वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि यह दूध केवल जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। डॉ. रंजना सिन्हा का कहना है कि किसानों को जागरूक होना चाहिए ताकि वे इस बेशकीमती दूध का सही उपयोग कर सकें और इसे बेकार न जाने दें।
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