रामपुर के कांग्रेस विधायक नंद लाल के निधन के बाद क्या होगा उपचुनाव, जानिए क्या कहते हैं नियम हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 5
हिमाचल प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट के कांग्रेस विधायक नंद लाल के निधन के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव की चर्चा तेज हो गई है। जानिए कि इस स्थिति में जनप्रतिनिधित्व कानून क्या कहता है और चुनाव आयोग की भूमिका क्या होगी।

रामपुर सीट हुई खाली

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में स्थित रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक नंद लाल का निधन हो गया है। उनके निधन के बाद अब यह विधानसभा सीट आधिकारिक तौर पर खाली हो गई है। नंद लाल 72 वर्ष के थे और वे राज्य में वित्तायोग के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। इस दुखद घटना के बाद अब प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या रामपुर में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे। चूंकि साल 2027 में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में रामपुर में होने वाला संभावित उपचुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता का सेमीफाइनल भी कहा जा सकता है।

विधायक नंद लाल का राजनीतिक सफर

नंद लाल का राजनीतिक करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पहली बार वर्ष 2007 में रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में कदम रखा और जीत हासिल की। उस समय उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बृज लाल को 6,470 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। इसके बाद साल 2012 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी जीत का अंतर बढ़ाते हुए 9,471 मतों से सफलता हासिल की। उस दौरान राज्य में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी और नंद लाल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बेहद करीबी माना जाता था।

उनकी जीत का सिलसिला 2017 में भी जारी रहा, जब वे 4,037 मतों से विजयी रहे। इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसमें नंद लाल ने 567 मतों के बेहद करीबी अंतर से कौल सिंह नेगी को हराकर जीत दर्ज की थी।

उपचुनाव को लेकर नियम क्या कहते हैं

कानूनी स्थिति की बात करें तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151A के तहत प्रावधान स्पष्ट हैं। यदि किसी सदस्य की मृत्यु, इस्तीफा या अयोग्यता के कारण विधानसभा की सीट रिक्त होती है, तो भारतीय चुनाव आयोग के लिए 6 महीने के भीतर वहां उपचुनाव आयोजित करना अनिवार्य होता है। हालांकि, इस नियम के साथ एक बड़ी शर्त जुड़ी है। यह अनिवार्यता तभी लागू होती है जब सदन का शेष कार्यकाल 1 वर्ष या उससे अधिक का हो। यदि रिक्त होने की तिथि से विधानसभा का कार्यकाल 1 वर्ष से कम शेष बचा है, तो ऐसी स्थिति में उपचुनाव कराना आयोग के लिए बाध्यकारी नहीं होता है।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार का कार्यकाल दिसंबर 2027 तक है। इस हिसाब से अभी विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में एक साल और लगभग डेढ़ महीने का समय बाकी है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सचिव यश पाल ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा की ओर से विधायक के निधन की आधिकारिक सूचना आज ही चुनाव आयोग को भेज दी जाएगी। इसके बाद उपचुनाव आयोजित करने या न करने का अंतिम निर्णय पूरी तरह से चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करेगा।

पहले भी हुआ है उपचुनाव का सामना

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हाल के वर्षों में उपचुनावों की स्थिति बनती रही है। सुक्खू सरकार के मौजूदा कार्यकाल के दौरान वर्ष 2024 में भी राज्य में उपचुनाव हुए थे। उस दौरान कुल 9 सीटों पर मतदान हुआ था, जिनमें से 6 सीटों पर कांग्रेस और 3 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। यह स्थिति तब बनी थी जब राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 6 विधायकों ने बगावत कर दी थी। उस दौरान धर्मशाला, सुजानपुर, देहरा, लाहौल स्पीति, कुटलेहड़, बड़सर, हमीरपुर सदर, गगेरट और नालागढ़ में उपचुनाव संपन्न हुए थे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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