क्या गर्भावस्था में मैगी खाना सुरक्षित है? डाइटिशियन ने साफ की हर उलझन, बताया कब बढ़ता है खतरा जीवनशैली 3 घंटे पहले 3
गर्भावस्था में मैगी खाने पर पूरी तरह रोक नहीं है, पर मात्रा का संतुलन जरूरी है। फरीदाबाद की सीनियर डाइटिशियन डॉ. रितिका शर्मा ने इससे जुड़ी आम गलतफहमियों को दूर किया।

गर्भावस्था का समय खान-पान को लेकर तरह-तरह के सवाल और सलाह लेकर आता है। इस दौरान महिलाओं को कभी खट्टा, कभी मीठा तो कभी अचानक मैगी जैसी चीजें खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। ऐसे में घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर चेतावनी देते हैं कि मैगी या फास्ट फूड का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कई महिलाओं के मन में यह दुविधा बनी रहती है कि गर्भावस्था में मैगी खाना ठीक है या नहीं।

क्या कहती हैं डाइटिशियन

फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉ. रितिका शर्मा के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान महिलाएं मैगी खा सकती हैं, बशर्ते इसकी मात्रा पर ध्यान रखा जाए। वे बताती हैं कि मैगी एक प्रोसेस्ड फूड है, जिसमें कई तरह के प्रिजर्वेटिव और दूसरे तत्व मिलाए जाते हैं। इसी कारण इसे रोजाना या अधिक मात्रा में खाना उचित नहीं माना जाता।

मैगी में मौजूद एमएसजी का असर

डॉ. रितिका का कहना है कि अगर कोई महिला सप्ताह में एक या दो बार मैगी खाती है तो इससे कोई खास परेशानी नहीं होती। लेकिन यदि यह रोज की आदत बन जाए और बड़ी मात्रा में खाई जाए तो नुकसान हो सकता है। उनके मुताबिक मैगी में एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) जैसे तत्व भी होते हैं, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाना बेहतर रहता है।

पपीता और अनानास को लेकर सच्चाई

गर्भावस्था में खाने-पीने को लेकर फैली धारणाओं पर डॉ. रितिका शर्मा कहती हैं कि अक्सर लोग पपीता और अनानास से पूरी तरह परहेज करने की सलाह देते हैं, लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। उनके अनुसार कच्चा पपीता खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह कुछ मामलों में परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं पका हुआ पपीता और पका हुआ अनानास आराम से खाया जा सकता है और इससे कोई दिक्कत नहीं होती।

फास्ट फूड और बाहर के खाने पर सलाह

फास्ट फूड के बारे में डॉ. रितिका बताती हैं कि कोई भी चीज जरूरत से ज्यादा खाना नुकसानदेह हो सकता है। मन होने पर सीमित मात्रा में फास्ट फूड लिया जा सकता है, मगर इसे रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाना ठीक नहीं। वे कहती हैं कि अगर चटपटा खाने की इच्छा हो तो ऐसी चीजें घर पर बनाकर खाना अधिक बेहतर है, क्योंकि घर के खाने में यह पता रहता है कि उसमें क्या-क्या डाला गया है।

संतुलित और पौष्टिक आहार सबसे जरूरी

डॉ. रितिका शर्मा के अनुसार गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर चीजों को डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, दूध, दही और नट्स बच्चे के विकास में सहायक होते हैं।

वे यह भी समझाती हैं कि नट्स हों, मिठाई हो या कोई और चीज, हर खाद्य पदार्थ की मात्रा बहुत मायने रखती है। गर्मियों में भी संतुलित मात्रा में ही खाना चाहिए। नट्स के लड्डू खाए जा सकते हैं, पर एक लड्डू तक ही सीमित रहना ठीक है, क्योंकि अधिक मात्रा नुकसान पहुंचा सकती है। हर चीज की अति हानिकारक होती है, इसलिए गर्भावस्था में संतुलित और पौष्टिक भोजन ही सबसे अहम है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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