गोंडा की कुसुम मौर्य का कमाल: घर पर तैयार पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस की मुंबई और दिल्ली तक भारी मांग जीवनशैली 3 घंटे पहले 3
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की रहने वाली कुसुम मौर्य ने घर पर जड़ी-बूटियों से पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस बनाना शुरू किया है, जिसकी मांग अब देशभर के प्रमुख शहरों तक पहुंच गई है।

आत्मनिर्भरता की राह पर कुसुम मौर्य

आज के दौर में महिलाएं न केवल परिवार संभाल रही हैं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज ब्लॉक में स्थित रायपुर गांव की निवासी कुसुम मौर्य ने अपनी मेहनत और जड़ी-बूटियों की समझ से एक सफल कार्य शुरू किया है। कभी घर के कामों तक सीमित रहीं कुसुम ने आज आयुर्वेदिक जूस के निर्माण के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना ली है। उनके द्वारा तैयार किए गए पथरी नाशक आयुर्वेदिक जूस की डिमांड अब केवल गोंडा जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल्ली, मुंबई, कानपुर और पंजाब जैसे बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है।

स्वयं सहायता समूह से मिला हौसला

कुसुम मौर्य के इस सफर की शुरुआत काफी साधारण तरीके से हुई थी। पहले वे एक गृहिणी के रूप में अपने घर की जिम्मेदारियां निभा रही थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में नया मोड़ आया। समूह के माध्यम से उन्हें औषधीय पौधों की उपयोगिता और जड़ी-बूटियों के महत्व की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने खुद औषधीय उत्पाद बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। आज वे कई तरह के आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनमें उनके द्वारा बनाया गया विशेष पथरी नाशक जूस लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है।

प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से निर्माण

कुसुम बताती हैं कि इस विशेष जूस को तैयार करने के लिए वे अपने ही घर और बगीचे में उगाए गए औषधीय पौधों का उपयोग करती हैं। वे कच्चा माल सीधे अपने बगीचे से लेती हैं, जिससे उत्पाद की शुद्धता बनी रहती है। निर्माण प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे विभिन्न जड़ी-बूटियों को एक निश्चित और सटीक मात्रा में मिलाकर मिश्रण तैयार करती हैं। सभी जड़ी-बूटियों को बहुत सावधानी से साफ करने के बाद उनसे अर्क या जूस निकाला जाता है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक होता है।

चिकित्सकीय सलाह और सावधानी

किसी भी आयुर्वेदिक उत्पाद का सेवन करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेना बहुत आवश्यक होता है। कुसुम इस बात को भली-भांति समझती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी को भी बिना सलाह के अपना जूस नहीं देती हैं। वे कहती हैं कि उनके पास आने वाले ग्राहकों की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ही वे उन्हें जूस लेने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए बिना उचित परामर्श के किसी भी औषधीय सेवन से बचना चाहिए। सामान्य तौर पर इस जूस को सुबह और शाम लेने का सुझाव दिया जाता है।

रोजगार का जरिया और आर्थिक पक्ष

इस पूरे उद्यम में कुसुम को अपने परिवार का भरपूर साथ मिल रहा है, विशेष रूप से उनके पति हर मोड़ पर उनका सहयोग करते हैं। उनके इस काम से न केवल उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है, बल्कि गांव की करीब 10 से 12 अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर मिला है। आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो एक बोतल तैयार करने में लगभग 500 से 600 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसकी बिक्री 1,000 रुपये के करीब की जाती है। वर्तमान में हर महीने लगभग 100 बोतलों की बिक्री हो रही है। कुसुम का भविष्य का लक्ष्य अपने उत्पादन को और अधिक बढ़ाना है ताकि देश के कोने-कोने में जरूरतमंदों तक उनके आयुर्वेदिक उत्पाद पहुंच सकें।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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