हरिद्वार: तीर्थ है, पिकनिक स्थल नहीं — श्रद्धालु इन नियमों का रखें ध्यान, वरना उठाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान उत्तराखंड एक महीने पहले 19
मां गंगा के तट पर बसे हरिद्वार में बढ़ते हुड़दंग और रील बनाने की होड़ ने तीर्थाटन को महज मौज-मस्ती का साधन बना दिया है। हर की पौड़ी के तीर्थ पुरोहित पंडित कन्हैया ने शास्त्रों के अनुसार हरिद्वार आने के सही नियम बताए हैं।

मोक्ष प्रदान करने वाली मां गंगा की गोद में बसी पवित्र नगरी हरिद्वार केवल एक पर्यटन स्थल भर नहीं है। यह सनातन आस्था का वह केंद्र है, जहां श्रद्धा के साथ कदम रखते ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुलने की मान्यता है। लेकिन समय के साथ एक गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है — क्या हम इस पावन भूमि की मर्यादा को भूलते जा रहे हैं?

आस्था के केंद्र में बदलती तस्वीर

गंगा किनारे मदिरापान, हुड़दंग और सोशल मीडिया पर रील बनाने की बढ़ती होड़ ने आज तीर्थयात्रा को केवल मनोरंजन और मौज-मस्ती का साधन बनाकर रख दिया है। जो स्थान आत्मशुद्धि और पुण्य अर्जन के लिए जाना जाता है, वहां की पवित्रता पर अब प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।

पुण्य के बजाय पाप के भागीदार

हर की पौड़ी के तीर्थ पुरोहित पंडित कन्हैया ने इस संवेदनशील विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि आज की बदली हुई जीवनशैली के कारण लोग पुण्य अर्जित करने के स्थान पर अनजाने में पाप के भागीदार बनते जा रहे हैं। उनके अनुसार, यदि मर्यादा और श्रद्धा का ध्यान न रखा जाए तो तीर्थाटन का वास्तविक उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।

शास्त्रों के अनुसार सही नियम

तीर्थ पुरोहित का कहना है कि हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। पवित्र भूमि की गरिमा बनाए रखते हुए, शुद्ध आचरण और श्रद्धा के साथ की गई यात्रा ही व्यक्ति को वास्तविक फल प्रदान करती है। मर्यादा का उल्लंघन करने पर श्रद्धालु को भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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