मंदिर बनते ही टूट जाती है छत! 500 साल पुराने माता धाम का अनोखा रहस्य, जानें मान्यता धर्म एक महीने पहले 24
छतरपुर जिले के लवकुश नगर स्थित हंसारी गांव की पहाड़ी पर मां हंसा देवी का 500 साल से भी पुराना प्राचीन स्थान है, जहां मान्यता है कि देवी कभी छत के नीचे नहीं रहतीं और गांव की हर संकट से रक्षा करती हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुश नगर के हंसारी गांव में एक ऐसा धार्मिक स्थान आज भी मौजूद है, जो अपने चमत्कारों के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है। गांव की पहाड़ी पर मां देवी का यह प्राचीन स्थल स्थित है। मान्यता है कि देवी कभी अपना मंदिर बनाकर नहीं रहतीं और वे छत के नीचे रहना पसंद नहीं करतीं। गांववालों ने कई बार मंदिर बनवाने की कोशिश की, लेकिन निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका।

गांव का नाम भी देवी के नाम पर

ग्रामीणों का कहना है कि जब भी इस गांव पर कोई संकट आता है, माता पहले ही उसका संकेत दे देती हैं। ग्रामीण लखन द्विवेदी बताते हैं कि जब से उनका गांव बसा है, तभी से वे मां हंसा देवी का यह प्राचीन स्थान देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार गांव का नाम ही देवी के नाम पर रखा गया है। माता हंसा देवी के नाम से प्रसिद्ध होने के कारण इस गांव का नाम हंसारी पड़ा।

लखन द्विवेदी के मुताबिक मां हंसा देवी का यह स्थान 500 साल से भी पुराना है। समय के साथ यह गांव कई बार उजड़ा और फिर से बसा, लेकिन माता का स्थान हमेशा अपनी जगह बना रहा।

छत बनी तो खुद फाड़कर निकल आईं देवी

गांव की एक महिला बताती हैं कि मां हंसा देवी का स्थान पहाड़ की ऊंचाई पर है, लेकिन माता कभी मंदिर के भीतर नहीं रहतीं और खुले में ही विराजमान रहती हैं। ग्रामीणों ने जब-जब छत बनवाने का प्रयास किया, माता ने स्वयं उस छत में चीरा लगा दिया। जैसे ही मंदिर का निर्माण शुरू होता है, उसमें बाधाएं आने लगती हैं, इसी कारण अब मंदिर नहीं बनवाया जाता।

महिला के अनुसार पहले माता का मंदिर बना भी था, लेकिन वे स्वयं छत फाड़कर बाहर निकल आईं। बुजुर्गों से सुनी बातों का हवाला देते हुए वे बताती हैं कि माता का मंदिर पहले सोने से बना हुआ था।

न पुजारी, न रोक-टोक — श्रद्धालु खुद चढ़ाते हैं प्रसाद

दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि जब माता अपना मंदिर ही नहीं बनवातीं, तो यहां कोई स्थायी पुजारी भी नहीं रहता। जो श्रद्धालु आते हैं, वे स्वयं ही प्रसाद चढ़ाते हैं और मनोकामना मांगकर तथा आशीर्वाद लेकर लौट जाते हैं।

नवरात्रि पर्व के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। छतरपुर जिले के अलावा झांसी और दिल्ली से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर गांव के ही पुजारी वहां व्यवस्था संभालते हैं।

संकट का संकेत पहले ही दे देती हैं माता

ग्रामीण पाल बताते हैं कि जब भी गांव पर कोई आफत आती है, माता खुद ही लोगों को उसकी जानकारी दे देती हैं। यदि कोई बाहरी व्यक्ति गांववालों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से आता है, तो उसका संकेत पहले ही मिल जाता है।

वे एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि वर्षों पहले एक बार चोरों का गिरोह लूटपाट के इरादे से गांव में घुस रहा था, लेकिन मां हंसा देवी ने सब संभाल लिया। माता एक व्यक्ति पर सवार होकर आने वाली अनहोनी के बारे में सब कुछ बता दिया। ग्रामीणों का विश्वास है कि माता का ऐसा आशीर्वाद है कि गांव की सीमा में ऐसा कोई व्यक्ति प्रवेश नहीं कर पाता, जो वहां कोई अनहोनी करने आता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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