तालिबान की कैद झेली, उल्फा ने बनाया बंधक; साइकिल से 191 देशों का सफर कर हिमाचल पहुंचे सोमेन, सुनाई संघर्ष की दास्तां हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 4
पश्चिम बंगाल के रहने वाले सोमेन देबनाथ ने साइकिल से 191 देशों की यात्रा पूरी की है, इस दौरान तालिबान और उल्फा के हाथों बंधक बनने के बावजूद उनका हौसला नहीं डिगा। अब वह पूरे भारत के भ्रमण पर निकले हैं।

साइकिल के पहियों पर घूमती जिंदगी और मन में पूरी दुनिया को नापने का अनोखा जज्बा। कुछ ऐसी ही अनूठी कहानी है पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के रहने वाले सोमेन देबनाथ की। सोमेन ने अपनी साइकिल पर सवार होकर दुनिया के एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 191 देशों का सफर तय किया है। विश्व भ्रमण के इस महाअभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब सोमेन भारत की यात्रा पर निकले हैं। इसी कड़ी में वह हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले पहुंचे। हमीरपुर में उन्होंने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें एडीसी (ADC) अभिषेक गर्ग और एसपी (SP) बलबीर सिंह ठाकुर शामिल हैं, से मुलाकात की और उनके साथ अपने जीवन के सबसे रोमांचक और उतार-चढ़ाव भरे अनुभवों को साझा किया।

साइकिल पर 20 साल और दो लाख किलोमीटर का सफर

सोमेन देबनाथ की यह अविश्वसनीय यात्रा आज से लगभग दो दशक पहले शुरू हुई थी। उन्होंने महज 23 वर्ष की आयु में 27 मई 2004 को अपने इस विश्व अभियान का शंखनाद किया था। इसके बाद लगातार करीब 20 वर्षों तक उनका यह सफर जारी रहा। इस लंबी अवधि में सोमेन ने दुनिया के सातों महाद्वीपों के 191 देशों की सीमाएं लांघीं और लगभग दो लाख किलोमीटर की दूरी अपनी साइकिल से ही पूरी की।

सोमेन के अनुसार, उनका यह अभियान केवल मनोरंजन या दुनिया की सैर करने तक सीमित नहीं था। इसके पीछे कई गहरे उद्देश्य छिपे थे। उन्होंने अपनी इस यात्रा को सामाजिक जागरूकता, जनसेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा दुनिया भर में भारतीय संस्कृति और आपसी सद्भाव का संदेश फैलाने का एक माध्यम बनाया।

जब मौत के मुंह से बचकर निकले सोमेन

दो लाख किलोमीटर की इस लंबी और कठिन यात्रा में सोमेन को कई बार बेहद खतरनाक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जहां उनकी जान पर बन आई थी। उनके सफर में आए कुछ सबसे खौफनाक मोड़ इस प्रकार हैं:

  • उल्फा उग्रवादियों की कैद: वर्ष 2006 में जब वह असम में थे, तब वहां सक्रिय उल्फा उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया था। वह करीब पांच दिन तक उग्रवादियों के कब्जे में रहे।
  • तालिबान का आतंक: वर्ष 2007 में अफगानिस्तान की यात्रा के दौरान, जब वह काबुल से हेरात की तरफ जा रहे थे, तब तालिबान के लड़ाकों ने उन्हें पकड़ लिया। तालिबान ने उन्हें भारतीय जासूस समझा और लगातार 24 दिनों तक अपनी कैद में रखा। काफी मुश्किलों के बाद वह वहां से सुरक्षित बाहर निकल पाए।
  • प्राकृतिक आपदा का गवाह: वर्ष 2004 में जब विनाशकारी सुनामी आई थी, तब वह श्रीलंका में ही मौजूद थे और उन्होंने इस तबाही के खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से बहुत करीब से देखा था।
  • अंटार्कटिका की बर्फीली सतह: सोमेन ने शून्य से भी बेहद नीचे के तापमान में अंटार्कटिका की खतरनाक बर्फीली सतहों पर भी अपनी साइकिल चलाई।
  • चीन में कोरोना संक्रमण: वर्ष 2020 में जब पूरी दुनिया कोविड-19 (COVID-19) महामारी की चपेट में आ रही थी, तब वह चीन में थे और वहां वह खुद भी इस वायरस से संक्रमित हो गए थे।

बचपन की साइकिल और प्रणब मुखर्जी का साथ

सोमेन देबनाथ का बचपन बेहद सामान्य और आर्थिक तंगहाली के बीच बीता था। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद उनके पिता ने उन्हें एक साइकिल दिलाई थी। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यही साइकिल एक दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा आधार बन जाएगी। शिक्षा की बात करें तो सोमेन ने प्राणि विज्ञान (जूलॉजी) और ललित कला (फाइन आर्ट्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की है। कॉलेज के दिनों में उन्होंने एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्कूलों में जाकर व्याख्यान देना शुरू किया। इसी दौरान उनके भीतर पूरी दुनिया घूमने और भारतीय संस्कृति की मिठास को वैश्विक स्तर पर फैलाने का सपना जागा।

इस सपने को उड़ान तब मिली जब वर्ष 2004 में वह दिल्ली पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से हुई। प्रणब मुखर्जी ने इस युवा के जज्बे को पहचाना और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने सोमेन को पासपोर्ट, वीजा और अन्य सभी जरूरी सरकारी औपचारिकताओं को पूरा कराने में व्यक्तिगत रूप से मदद की, जिससे सोमेन का आगे का रास्ता आसान हो गया।

अनुभवों पर किताब और नया 'रीयूनियन भारत' अभियान

सोमेन देबनाथ वर्तमान में अपने इन अद्भुत और रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभवों को एक पुस्तक का रूप दे रहे हैं। उनकी इस किताब का शीर्षक 'द वर्ल्ड बाइकिंग ओडिसी: 191 कंट्रीज' होगा। सोमेन का मानना है कि इस यात्रा ने उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों, विविधताओं और दुनिया भर के लोगों को बहुत करीब से देखने और समझने का एक अनूठा नजरिया दिया है।

दुनिया नापने के बाद अब सोमेन ने अपने देश भारत को नए सिरे से समझने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है, जिसका नाम है 'रीयूनियन भारत : वन ट्री, वन लाइफ, Indian Youth & Sports'। यह अभियान 27 मई 2026 से शुरू होकर 27 मई 2027 तक चलेगा। इस अभियान के तहत वह एक बार फिर साइकिल पर सवार होकर पूरे भारत का दौरा कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी यात्रा का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को सचेत करना, देश के युवाओं को सशक्त बनाना और खेल संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाना है।

सोमेन कहते हैं कि वह अपनी इस यात्रा के जरिए यह करीब से देखना और महसूस करना चाहते हैं कि पिछले 22 वर्षों में उनका प्यारा भारत कितना बदल चुका है और आज का भारत उनकी अपनी नजरों में कैसा दिखाई देता है।

हमीरपुर के एसपी (SP) बलबीर सिंह ठाकुर ने सोमेन के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। उन्होंने सोमेन को एक प्रशस्ति पत्र भेंट किया और कहा कि यह हमारे देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि सुंदरबन का एक युवा साइकिल के सहारे पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति, शांति और भाईचारे का संदेश पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमेन ने न केवल विपरीत परिस्थितियों में अपनी हिम्मत बनाए रखी, बल्कि वैश्विक मंच पर देश का मान भी बढ़ाया है। उनका कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों और राष्ट्राध्यक्षों से मिलना यह साबित करता है कि सच्चे इरादों और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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