प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी के बाद मुश्किल में किशोरी, तीन बार घर बदलने को मजबूर हुआ परिवार हरियाणा एक घंटा पहले 3
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद नोएडा की एक 15 साल की किशोरी और उसकी मां को भारी ट्रोलिंग और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें बार-बार ठिकाना बदलना पड़ा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद बढ़ा संकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में फंसी 15 वर्षीय किशोरी और उसकी मां के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद से ही यह परिवार लगातार मुश्किलों से घिर गया है और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर अपनी जगह तीन बार बदलनी पड़ी है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी किशोरी के वकील अनिल कुमार ने साझा की है।

कानूनी कार्रवाई और उम्र को लेकर स्पष्टीकरण

वकील अनिल कुमार के अनुसार, जब इस मामले में शिकायत दर्ज की गई थी, तब लड़की की आयु 14 वर्ष थी और अब वह 1 अगस्त को 15 वर्ष की हो गई है। वायरल वीडियो के आधार पर एक वकील की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। इस कानूनी दस्तावेज में उस वीडियो का जिक्र किया गया है जिसमें किशोरी कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करती हुई दिखाई दे रही है। हालांकि, एफआईआर में लड़की की उम्र का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। उस पर BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मानहानि, जानबूझकर अपमान करने और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप लगाए गए हैं।

लगातार धमकियों से दहशत का माहौल

वकील अनिल कुमार ने दावा किया है कि लड़की ने घटना के बाद सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद उसे सोशल मीडिया पर रेप और जान से मारने की धमकियां लगातार मिल रही हैं। वकील ने बताया कि जब नोएडा स्थित उनके घर पर कुछ अज्ञात लोग और पुलिसकर्मी पहुंचने लगे, तो परिवार ने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर वहां से निकलना ही उचित समझा। वे पहले फरीदाबाद में एक रिश्तेदार के घर रहने गए, लेकिन वहां भी धमकियों का सिलसिला नहीं थमा, जिसके कारण उन्हें फिर से एक अज्ञात स्थान पर शरण लेनी पड़ी है।

गलत पहचान और अफवाहों का खंडन

सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए वकील ने स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा 'रुचिका' नाम उस लड़की का असली नाम नहीं है। ऑनलाइन दावों में उसे 25 साल की सैलून वर्कर बताया जा रहा है, जो कि पूरी तरह गलत है। वास्तव में वह एक 15 साल की नाबालिग छात्रा है, जो दिल्ली के एक स्कूल में ओपन सिस्टम के माध्यम से 10वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। वकील ने यह भी बताया कि लड़की की मां एक सिंगल पेरेंट हैं और वे निजी ट्यूशन पढ़ाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं।

निजता का उल्लंघन और असुरक्षा

अनिल कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि एफआईआर में किशोरी का पता सार्वजनिक होने के बाद उनके जीवन पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है। वकील ने बताया कि पता लीक होने के चलते राजनीतिक रूप से सक्रिय लोग और अराजक तत्व लगातार उनके घर पहुंचने लगे थे, जो उन्हें रेप समेत कई गंभीर धमकियां दे रहे थे। इस प्रकार की लगातार प्रताड़ना और जान के खतरे को देखते हुए परिवार को अपना घर और दिनचर्या छोड़कर भागना पड़ा है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यधिक दबाव में हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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