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एक घंटा पहले
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विचारों
झुमरीतिलैया की पुरानी यादों को समर्पित पंडाल
झुमरीतिलैया का नाम सुनते ही देश के पुराने संगीत प्रेमी रेडियो पर बजने वाले उन गीतों को याद करने लगते हैं, जिनकी फरमाइशें कभी इस शहर से सबसे ज्यादा भेजी जाती थीं। आज की आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में, कोडरमा जिले के बेलाटांड़ स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को संजोने का अनूठा प्रयास किया है। इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर यहाँ एक विशाल और भव्य गिटार के आकार का पूजा पंडाल बनाया गया है, जो शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
संगीत और विरासत का अनूठा संगम
1990 के दशक की बात करें तो रेडियो पर विविध भारती और बिनाका गीतमाला जैसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में झुमरीतिलैया से जाने वाले पत्रों का एक अलग ही दबदबा हुआ करता था। उस दौर में यहां के संगीत प्रेमी अपने पसंदीदा गानों की फरमाइश रेडियो पर भेजते थे, और पूरे देश में इस शहर की पहचान एक संगीत प्रेमी शहर के रूप में स्थापित हो गई थी। सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति बेलाटांड़ ने इसी गौरवशाली परंपरा को इस बार की दुर्गा पूजा का मुख्य आधार बनाया है। गिटार के प्रारूप में बने इस पंडाल को देखकर आने वाले श्रद्धालुओं को रेडियो के वे दिन याद आ जाते हैं, जब संगीत ही मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था।
पंडाल की विशालता और कारीगरी
समिति के सदस्य जिम्मी सिंह ने बताया कि इस बार पूजा पंडाल को कुछ नया और भव्य रूप देने का लक्ष्य रखा गया था। इसके निर्माण कार्य में बारीकियों का विशेष ध्यान रखा गया है। इस शानदार पंडाल को जामताड़ा से बुलाए गए कुशल कारीगरों ने तैयार किया है, जबकि पंडाल के भीतर विराजमान मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा का निर्माण हजारीबाग के कलाकारों द्वारा किया गया है। यदि हम पंडाल की भव्यता की बात करें, तो इसकी चौड़ाई लगभग 100 फीट है और इसकी कुल ऊंचाई करीब 70 फीट मापी गई है। यह संरचना न केवल कला का एक बेहतरीन नमूना है, बल्कि संगीत के प्रति शहर के लगाव को भी बयां करती है।
रौशनी से जगमगाएगा बेलाटांड़
पूजा पंडाल ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे इलाके को भी त्योहार के रंग में रंगा गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्सव के उत्साह को देखते हुए सड़क के दोनों किनारों पर लगभग 500 मीटर के दायरे में रंग-बिरंगी लाइटिंग की गई है। इसके अलावा, भक्तों के स्वागत के लिए जगह-जगह आकर्षक तोरण द्वार सजाए गए हैं, जो शाम होते ही अपनी दूधिया रोशनी से पूरे क्षेत्र को जगमगा देंगे। समिति ने सजावट के इस काम पर करीब 3.50 लाख रुपये की राशि खर्च की है, ताकि हर तरफ एक दिव्य माहौल बना रहे।
77 वर्षों की गौरवशाली परंपरा
सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति बेलाटांड़ इस वर्ष अपनी पूजा का 77वां वर्ष मना रही है। इतने दशकों से चली आ रही यह पूजा स्थानीय निवासियों के लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और आपसी एकता का एक बड़ा प्रतीक है। इस वर्ष की गिटार थीम के माध्यम से पुरानी पीढ़ी अपनी उन यादों को ताजा कर रही है, जब वे रेडियो के पास बैठकर फरमाइशों का इंतजार करते थे। साथ ही, यह नई पीढ़ी को झुमरीतिलैया के उस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने का एक बेहतरीन माध्यम भी है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हजारों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समिति पूरी तरह से मुस्तैद है। पूरे पंडाल परिसर के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है, ताकि हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा सके। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए बड़ी संख्या में वालंटियर तैनात किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और दर्शन सुचारू रूप से चलते रहें, इसके लिए एनसीसी कैडेट्स को भी व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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